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नागपुर में लाउडस्पीकर, डीजे और साउंड सिस्टम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्ती की मांग उठी है। समाजसेवी एवं ध्वनि प्रदूषण नियमों के पालन के पक्षधर ध्यानशंकर तिवारी ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय उनके लिए स्पष्ट डेसिबल लिमिट तय की जाए और निर्धारित सीमा का सख्ती से पालन कराया जाए।
उनका कहना है कि शहर में विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों, धार्मिक कार्यक्रमों और अन्य अवसरों पर साउंड सिस्टम के इस्तेमाल से होने वाले अत्यधिक शोर को नियंत्रित करने की जरूरत है। इसके लिए नियमों का समान रूप से पालन जरूरी है, ताकि ध्वनि प्रदूषण कम करने के साथ-साथ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले असर को भी कम किया जा सके।
मांग में यह भी कहा गया है कि सिर्फ त्योहारों तक नियमों को सीमित रखने के बजाय शहर के सभी सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित ध्वनि सीमा लागू हो। नियमों का उल्लंघन करने वाले साउंड सिस्टम संचालकों या आयोजकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू की जानी चाहिए।
वहीं, साउंड सिस्टम से जुड़े व्यवसाय और इससे रोजगार पाने वाले लोगों के हितों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है। उनका मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय व्यावहारिक डेसिबल सीमा और स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं, जिससे ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ संबंधित व्यवसायों की आजीविका भी प्रभावित न हो।
पोस्ट में 3 सितंबर से 1 नवंबर तक लाउडस्पीकर पर रोक के फैसले की समीक्षा की अपील का भी उल्लेख किया गया है। मांग का मुख्य उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना, नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना और शहर में सार्वजनिक आयोजनों के दौरान संतुलित व्यवस्था बनाए रखना है।
मुख्य मांग यही है कि लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के लिए स्पष्ट डेसिबल लिमिट निर्धारित की जाए तथा निर्धारित सीमा से अधिक आवाज करने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।