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नागपुर: नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने निर्वाचित सदस्यों के आधिकारिक कामकाज में उनके परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों की अनधिकृत दखलंदाजी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। महानगरपालिका ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि उनके परिजन या करीबी सहयोगी किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी पर प्रभाव डालने, निर्देश देने या सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करने का प्रयास न करें।
NMC के अनुसार, निर्वाचित प्रतिनिधियों के रिश्तेदारों द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देना या उनके निर्णयों को प्रभावित करना प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारों की निर्धारित सीमा के खिलाफ है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को भी किसी प्रकार के अनधिकृत दबाव में आए बिना नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या कहा गया है निर्देश में?
निर्वाचित सदस्यों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि उनके परिवार के सदस्य या करीबी रिश्तेदार नगरपालिका अधिकारियों और कर्मचारियों के काम में हस्तक्षेप न करें, उनकी ओर से निर्देश जारी न करें और ऐसे मामलों में प्रभाव डालने की कोशिश न करें जिनका अधिकार उन्हें कानूनी रूप से प्राप्त नहीं है।
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों को किसी भी अनधिकृत निर्देश या हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करना चाहिए। अधिकारियों से नियमों और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करने को कहा गया है।
उल्लंघन पर हो सकती है कार्रवाई
इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने भी गंभीरता जताई है। नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों के मामले में परिस्थितियों के अनुसार निर्वाचित सदस्य के खिलाफ अयोग्यता जैसी कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है। इसलिए निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने पद की जिम्मेदारियों और अधिकारों की सीमाओं का पालन करने की सलाह दी गई है।
NMC का यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और अधिकारियों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महानगरपालिका का संदेश साफ है कि सार्वजनिक पद के साथ सार्वजनिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है और किसी भी प्रकार की अनौपचारिक या प्रॉक्सी अथॉरिटी को प्रशासनिक कामकाज में जगह नहीं दी जानी चाहिए।