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सरोगेट विज्ञापनों के जरिए तंबाकू, गुटखा, पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे विज्ञापनों से जुड़े ब्रांड्स के साथ-साथ सेलिब्रिटीज, विज्ञापन एजेंसियों और प्रचार से जुड़े अन्य पक्षों की भूमिका पर भी नजर रखी जा रही है।
सरकार का मानना है कि सरोगेट विज्ञापन उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं, खासकर युवाओं पर इनका प्रभाव गंभीर हो सकता है। ऐसे विज्ञापनों में कई बार प्रतिबंधित उत्पादों के समान नाम, लोगो या ब्रांड पहचान का इस्तेमाल कर दूसरे उत्पादों का प्रचार किया जाता है।
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कंपनियों, विज्ञापन एजेंसियों और प्रचार करने वाले चेहरों की जवाबदेही तय की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रचार से जुड़ा कोई भी पक्ष नियमों से ऊपर नहीं है।
विशेष रूप से लोकप्रिय फिल्मी सितारों और अन्य सेलिब्रिटीज को विज्ञापन स्वीकार करने से पहले उससे जुड़े नियमों और दावों की जांच करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य भ्रामक प्रचार को रोकना और उपभोक्ताओं, विशेषकर युवाओं को हानिकारक उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार से बचाना है। आने वाले समय में नियमों के उल्लंघन पर निगरानी और कार्रवाई और कड़ी हो सकती है।