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मर्द ना जायेंगे मंदिर में ।

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मर्द ना जायेंगे मंदिर में । Good Morning Nagpur

सबरीमाला केस: 'कई मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश भी वर्जित', सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील**

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में चल रहे ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर मामले के दौरान सरकार ने एक दिलचस्प दलील पेश की है। केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक के बचाव में सरकार ने देश के अन्य मंदिरों की परंपराओं का हवाला दिया है।
*दलील के मुख्य बिंदु:**
 * **पुरुषों पर भी है पाबंदी:** सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि भारत में केवल महिलाओं पर ही नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर भी कड़े प्रतिबंध हैं।
 * **पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर:** दलील में राजस्थान के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर का उदाहरण दिया गया, जहाँ विवाहित पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। मान्यता है कि यहाँ केवल सन्यासी या अविवाहित पुरुष ही गर्भगृह तक जा सकते हैं।
 * **ब्यूटी पार्लर जाकर महिलाओं जैसा श्रृंगार:** सरकार ने केरल के ही एक मंदिर (कोट्टंकुलंगरा देवी मंदिर) का उल्लेख किया, जहाँ की परंपरा बेहद अनूठी है। यहाँ एक विशेष उत्सव के दौरान पुरुष मंदिर में प्रवेश करने से पहले ब्यूटी पार्लर जाकर महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करते हैं, साड़ी पहनते हैं और पूरी तरह महिला का रूप धारण करने के बाद ही उन्हें भीतर जाने की अनुमति मिलती है।
क्यों दी गई यह दलील?**
सरकार का तर्क है कि भारत में धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं विविधतापूर्ण हैं। जिस तरह कुछ स्थानों पर पुरुषों के प्रवेश के लिए विशेष नियम हैं, वैसे ही सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर परंपरा का पालन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि ऐसे नियम केवल लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) पर आधारित नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे गहरी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:**
सबरीमाला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग (10-50 वर्ष) की महिलाओं के प्रवेश पर सदियों पुरानी रोक लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है कि क्या यह रोक महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है या यह धर्म के पालन की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है।
**इनसाइट:** यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति में मंदिरों की परंपराएं कितनी विविध हैं और कानून की नजर में इन परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
न्यूज़ हाई कोर्ट सोर्स 
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