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शहर मे शोर्ट डिलीवरी का शोर,सड़कों पर उतरे शहरवासी

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शहर मे शोर्ट डिलीवरी का शोर,सड़कों पर उतरे शहरवासी Good Morning Nagpur

नागपुर के नापतोल विभाग (Legal Metrology Department) और पेट्रोल पंपों पर "शॉर्ट डिलीवरी" (कम तेल मिलना) को लेकर चल रही शिकायतों .

 नागपुर नापतोल विभाग की सुस्ती, जनता की जेब पर डाका
नागपुर | शहर में ईंधन संकट और लंबी कतारों के बीच अब एक नया खुलासा सामने आ रहा है। नागपुर के कई पेट्रोल पंपों पर 'शॉर्ट डिलीवरी' (Short Delivery) के जरिए ग्राहकों को चूना लगाया जा रहा है, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जिले का नापतोल विभाग (Legal Metrology Department) गहरी नींद में सोया हुआ है।
झोटे और अन्य अधिकारियों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय उपभोक्ताओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें झोटे (Zhote) जैसे नाम शामिल हैं, शिकायतों के बावजूद पंपों पर औचक निरीक्षण करने में नाकाम रहे हैं। जनता का आरोप है कि:
 * कई मशीनों के 'सीलिंग' और 'कैलिब्रेशन' की समय सीमा खत्म हो चुकी है।
 * विभाग के अधिकारी फील्ड विजिट के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं।
 * पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य '5 लीटर जार चेक' की सुविधा कई जगह उपलब्ध नहीं है, फिर भी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
शॉर्ट डिलीवरी का खेल: कैसे कट रही है आपकी जेब?
जांच में पाया गया है कि कुछ पंपों पर नोजल में ऐसी तकनीकी छेड़छाड़ (Chip manipulation) की गई है जिससे मीटर पर तो पूरी रीडिंग दिखती है, लेकिन असल में वाहन की टंकी में 2% से 3% कम ईंधन जाता है। 50 लीटर के टैंक पर यह नुकसान ₹150 से ₹200 तक हो सकता है।
विभाग की निष्क्रियता पर जनता का आक्रोश
नागपुर के नागरिक अब सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब ईंधन की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं, ऐसे में सरकारी अधिकारियों की निश्र्क्रियता (Inaction) सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।
 "हमने कई बार सिविल लाइंस स्थित सहायक नियंत्रक (Assistant Controller) कार्यालय में शिकायत की, लेकिन 'जांच करेंगे' के अलावा कोई ठोस जवाब नहीं मिला।" - एक पीड़ित उपभोक्ता
 * उपभोक्ता अदालत: नागरिक सीधे कंज्यूमर कोर्ट का रुख कर विभाग और पंप मालिक दोनों को कटघरे में खड़ा कर सकते हैं।

 
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