“Courage allows us to face challenges with confidence and transform obstacles into opportunities for growth.”
"With faith in God and confidence in yourself, nothing is impossible."
The Less Competent should not judge the More Competent.
“If you are patient in one moment of anger, You will escape a hundred days of sorrow.”
“You will face many defeats in life, but never let yourself be defeated.”
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लोकसभा में परिसीमा से कितनी सीट कोन से राजों में बढ़ेगी ।
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बड़ी खबर: 850 सीटों वाली नई लोकसभा का पूरा गणित, जानें आपके राज्य को मिलेंगी कितनी सीटें!
*नई दिल्ली:भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। संसद के नए भवन के बाद अब सीटों के विस्तार की चर्चा जोरों पर है। जनसंख्या के आधार पर होने वाले आगामी परिसीमन (Delimitation) के बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या **543 से बढ़ाकर 850** की जा सकती है।
इस बदलाव से देश के राजनीतिक मानचित्र में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ सकती हैं:
*राज्यों का नया संभावित सीट समीकरण (कुल 850 सीटें):**
| राज्य | वर्तमान सीटें | संभावित नई सीटें |
|---|---|---|
| **उत्तर प्रदेश** | 80 | **125 - 143** |
| **महाराष्ट्र** | 48 | **75 - 76** |
| **पश्चिम बंगाल** | 42 | **60 - 65** |
| **बिहार** | 40 | **62 - 70** |
| **तमिलनाडु** | 39 | **61** |
| **मध्य प्रदेश** | 29 | **45 - 50** |
| **कर्नाटक** | 28 | **44** |
| **गुजरात** | 26 | **40** |
| **राजस्थान** | 25 | **40** |
| **आंध्र प्रदेश** | 25 | **38** |
| **ओडिशा** | 21 | **33** |
| **केरल** | 20 | **31** |
| **तेलंगाना** | 17 | **26** |
| **असम** | 14 | **22** |
| **पंजाब** | 13 | **20** |
### **खबर के मुख्य बिंदु:**
* **औसत 56% की वृद्धि:** जनसंख्या के अनुपात को देखते हुए लगभग हर राज्य में सीटों की संख्या में 56% तक का इजाफा देखा जा सकता है।
* **उत्तर भारत का दबदबा:** उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में सीटों की संख्या सबसे अधिक बढ़ेगी, जिससे केंद्र की राजनीति में इनका प्रभाव और भी गहरा हो जाएगा।
* **महिला आरक्षण का प्रभाव:** नई लोकसभा में 850 सीटें होने पर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत लगभग **283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित** होंगी।
* **संतुलन की चुनौती:** दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे केरल और तमिलनाडु) ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसलिए वहां सीटों की वृद्धि उत्तर भारत के मुकाबले कम रहने की संभावना है, जिससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बदल सकता है।
*क्यों जरूरी है यह विस्तार?**
वर्तमान में एक सांसद पर लाखों मतदाताओं का बोझ है। 1971 की जनगणना के बाद से लोकसभा की सीटें स्थिर हैं, जबकि आबादी कई गुना बढ़ चुकी है। बेहतर प्रशासन और जनता की आवाज को संसद तक मजबूती से पहुंचाने के लिए सीटों का विस्तार अनिवार्य माना जा रहा है।
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