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सरिया क़ानून की वेदता : सुप्रीम कोर्ट सक्त
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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: शरीयत कानून की वैधता पर केंद्र से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (**16 अप्रैल 2026**) को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से **4 हफ्तों के भीतर** जवाब मांगा है। यह याचिका मुस्लिम पर्सनल लॉ के उन प्रावधानों को चुनौती देती है जो महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं।
**मुख्य बिंदु:**
* **समानता का अधिकार:** याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1937 का यह अधिनियम संविधान के **अनुच्छेद 14** (समानता का अधिकार) और **अनुच्छेद 15** का उल्लंघन करता है।
* **भेदभावपूर्ण नियम:** याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान उत्तराधिकार नियमों के तहत मुस्लिम महिलाओं को पुरुष समकक्षों की तुलना में संपत्ति में आधा या उससे भी कम हिस्सा मिलता है, जो कि पूरी तरह भेदभावपूर्ण है।
* **समान नागरिक संहिता (UCC):** सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि **समान नागरिक संहिता एक "संवैधानिक महत्वाकांक्षा" है।**
* **सीधे प्रभावितों की भागीदारी:** कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में उन मुस्लिम महिलाओं को भी पक्षकार बनाया जाए जो इस कानून से सीधे तौर पर प्रभावित हैं, ताकि उनकी बात सुनी जा सके।
### **न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ:**
> "समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक महत्वाकांक्षा है और अब समय आ गया है कि इस दिशा में विचार किया जाए। हम यह भी देखना चाहते हैं कि क्या व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है या यह संसद का काम है।"
*आगे क्या होगा?**
अदालत ने वकील प्रशांत भूषण को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर पीड़ित महिलाओं को भी याचिका में शामिल करें। अब केंद्र सरकार के जवाब पर निर्भर करेगा कि देश में व्यक्तिगत कानूनों के भविष्य और उत्तराधिकार के नियमों में क्या बदलाव आते हैं।