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अशोक खरात पर नरम पड़ी सरकार, नेता अधिकारियों के संपर्क से जाँच मे बाधा ।
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Good Morning Nagpur
अशोक खरात (Ashok Kharat) मामले में ताज़ा अपडेट यह है New Delhi:प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस केस में एंट्री मार दी है। जहाँ पहले सिर्फ बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोप थे, अब मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के बड़े खेल का खुलासा हो रहा है।
ED की बड़ी कार्रवाई
* **ECIR दर्ज:** ED ने अशोक खरात और उसके करीबियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला (ECIR) दर्ज किया है।
* **11 जगहों पर छापेमारी:** हाल ही में ED और इनकम टैक्स विभाग ने मिलकर अशोक खरात के घर, ऑफिस, फार्महाउस और उसके 'ईशान्येश्वर मंदिर' समेत 11 ठिकानों पर एक साथ रेड की है।
* **बेहिसाब संपत्ति:** जांच में सामने आया है कि खरात ने अलग-अलग नामों से लगभग **132 बैंक खाते** खुलवाए थे, जिनके जरिए करीब **62.74 करोड़ रुपये** का संदिग्ध लेनदेन किया गया।
### 2. "बुलडोजर" पर उठते सवाल और राजनीतिक घमासान
सकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है कि वह खरात के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर क्यों नहीं चला रही है।
* **विपक्ष का हमला:** कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने सनसनीखेज दावा किया है कि खरात का "एनकाउंटर" किया जा सकता है ताकि उसके साथ जुड़े बड़े नेताओं और मंत्रियों के नाम सामने न आ सकें।
* **सत्ता पक्ष का बचाव:** सरकार का कहना है कि SIT (Special Investigation Team) गठित कर दी गई है और जांच पूरी निष्पक्षता से चल रही है।
### 3. केस की वर्तमान स्थिति (Status)
* **धाराएं:** खरात पर अब तक **12 FIR** दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से 8 मामले यौन शोषण और बलात्कार के हैं। उस पर जादू-टोना विरोधी कानून (Anti-Superstition Act) के तहत भी केस दर्ज है।
* **SIT जांच:** 24 सदस्यों वाली SIT टीम ने अब तक 30 से अधिक पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज किए हैं।
* **धोखाधड़ी का तरीका:** पुलिस को छापेमारी में 'मैकेनिकल सांप' और अन्य तांत्रिक वस्तुएं मिली हैं, जिनका इस्तेमाल वह लोगों को डराने और ठगने के लिए करता था।
### 4. ताज़ा अदालती फैसला
अशोक खरात फिलहाल पुलिस हिरासत में है। नासिक की कोर्ट ने उसे **20 अप्रैल 2026** तक न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है। पुलिस अब उन पेन ड्राइव और दस्तावेजों की जांच कर रही है जिनमें रसूखदार लोगों के शामिल होने के सबूत मिलने की आशंका है।
**निष्कर्ष:** ED की एंट्री के बाद अब यह मामला सिर्फ 'फर्जी बाबा' का नहीं रहा, बल्कि एक बड़े वित्तीय घोटाले और राजनीतिक गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है। यही कारण है कि "बुलडोजर" की मांग अब एक बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बन गई है।