“Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
सवा करोड़ दो और लो तलक ,बीवी रही सात महीने ।
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Good Morning Nagpur
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "7 महीने का साथ हो या ज्यादा, शर्तें पूरी होने पर ही मिलेगा तलाक"**
**नई दिल्ली:** भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वित्तीय देनदारियों और समझौतों को पूरा किए बिना कानूनी अलगाव (तलाक) की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को ₹1.25 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद ही उसके तलाक की डिक्री को मंजूरी दी जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि: सिर्फ 7 महीने का वैवाहिक जीवन**
यह मामला तब चर्चा में आया जब पति ने अदालत के सामने अपनी दलील रखी कि विवाह के बाद वे दोनों केवल **7 महीने** ही साथ रहे थे। पति का तर्क था कि इतने कम समय के वैवाहिक संबंध के लिए वह पहले ही एक बड़ी राशि (**₹1.65 करोड़**) का भुगतान कर चुका है। उसने अदालत से अपील की थी कि इस राशि को पर्याप्त माना जाए और उसे तलाक की अनुमति दी जाए।
**सोने की वापसी पर फंसा पेंच**
सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील ने मामले में एक नया मोड़ ला दिया। वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि पूर्व में हुए समझौते के अनुसार, पति को न केवल नकद राशि, बल्कि **1 किलोग्राम सोना** भी लौटाना था। पत्नी पक्ष का दावा है कि पति ने अभी तक इस शर्त को पूरी तरह से निभाया नहीं है, जिसके कारण विवाद बना हुआ है।
### **सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख**
जस्टिस की पीठ ने पति की 'कम समय साथ रहने' वाली दलील को दरकिनार करते हुए वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा:
> "तलाक की कानूनी औपचारिकताएं तभी पूरी मानी जाएंगी जब तयशुदा ₹1.25 करोड़ की बकाया राशि पत्नी को सौंप दी जाएगी।"
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कानूनी विशेषज्ञों की राय**
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन मामलों में एक मिसाल बनेगा जहाँ लोग वैवाहिक समय कम होने का हवाला देकर अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हैं। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि एक बार समझौता (Settlement) होने के बाद, उसकी शर्तों को हर हाल में पूरा करना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु एक नजर में
* **कोर्ट का आदेश:** ₹1.25 करोड़ का भुगतान अनिवार्य।
* **पति का पक्ष:** ₹1.65 करोड़ पहले ही दिए जा चुके हैं, सिर्फ 7 महीने साथ रहे।
* **विवाद का कारण:** 1 किलोग्राम सोने की वापसी और बकाया राशि।
* **परिणाम:** भुगतान पूरा होने तक तलाक की डिक्री रुकी रहेगी।
सोर्स न्यायालय ।