“Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
गैस एजेन्सी की मनमानी प्रशासन मौन ।
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Good Morning Nagpur
*बड़ी लापरवाही: उपराजधानी में गैस एजेंसियों की मनमानी, ग्राहकों की सब्सिडी डकार रहे 'गैस माफिया'?**
**नागपुर (उपराजधानी):**
शहर में इन दिनों रसोई गैस उपभोक्ताओं के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों को लेकर हो रही धांधली ने आम नागरिकों का बजट बिगाड़ दिया है। आरोप है कि कई गैस एजेंसियां मिलीभगत कर ग्राहकों के हिस्से की सब्सिडी वाले सिलेंडर 'काले बाजार' में डकार रही हैं, जिससे सीधा आर्थिक नुकसान उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर ग्राहक**
हजारों उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनके कोटे के सिलेंडर डिलीवर दिखाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में उन्हें गैस मिली ही नहीं। जब परेशान ग्राहक गैस एजेंसी के दफ्तर पहुँचते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय टालमटोल किया जा रहा है। कई बुजुर्ग और मध्यमवर्गीय परिवार घंटों लाइन में लगकर अपनी सब्सिडी का हिसाब मांग रहे हैं, लेकिन सिस्टम की खामियों का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
* **सब्सिडी का खेल:** कागजों पर सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी दिखाई जा रही है, जिससे सरकार की तरफ से आने वाली सब्सिडी का दुरुपयोग हो रहा है।
* **ग्राहकों की परेशानी:** बुकिंग के बावजूद हफ्तों तक सिलेंडर न मिलना और एजेंसी प्रबंधकों का अभद्र व्यवहार अब आम बात हो गई है।
* **कालाबाजारी का शक:** आशंका जताई जा रही है कि सब्सिडी वाले इन सिलेंडरों को व्यावसायिक होटलों और ढाबों पर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
* **प्रशासन की चुप्पी:** इस बड़े घोटाले की सुगबुगाहट के बावजूद अब तक आपूर्ति विभाग (Supply Department) की ओर से किसी बड़ी कार्रवाई की खबर नहीं आई है।
### **उपभोक्ताओं की मांग**
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पेट्रोलियम मंत्रालय से मांग की है कि उपराजधानी की सभी संदिग्ध गैस एजेंसियों का ऑडिट किया जाए। ग्राहकों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में भी अगर उनकी सब्सिडी चोरी हो रही है, तो यह सिस्टम की बड़ी विफलता है।
**ब्यूरो रिपोर्ट: