“Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
इंडक्शन का इस्तेमाल भारी पड़ेगा जनता को ।
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इंडक्शन की तपिश से बिजली बिल में लगेगी 'आग', गैस की किल्लत से उपभोक्ता पस्त
नागपुर: रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत और सप्लाई में देरी ने आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। गैस सिलेंडरों की कमी के कारण अब लोग मजबूरी में इंडक्शन कुकटॉप (Induction Cooktop) और इलेक्ट्रिक हीटर का रुख कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह समाधान राहत के बजाय जेब पर भारी पड़ने वाला है।
प्रमुख बिंदु:
* गैस की भारी किल्लत: पिछले कुछ हफ्तों से गैस वितरण में हो रही देरी के कारण उपभोक्ताओं को हफ्तों तक रीफिल का इंतजार करना पड़ रहा है। कई इलाकों में 'ब्लैक' में सिलेंडर बिकने की भी खबरें हैं।
* बिजली बिल का झटका: गैस न होने पर घर की रसोई अब बिजली पर निर्भर हो गई है। इंडक्शन का लगातार इस्तेमाल घर के बिजली मीटर की रफ्तार को बढ़ा रहा है, जिससे महीने के अंत में बिजली बिल में 20% से 40% तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
* मध्यम वर्ग की दोहरी मार: एक तरफ महंगी गैस और उसकी कमी, दूसरी तरफ बिजली की बढ़ती दरें—आम आदमी अब 'आसमान से गिरा, खजूर में अटका' वाली स्थिति में है।
विशेषज्ञों की राय:
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इंडक्शन का उपयोग केवल आपातकालीन स्थिति में ही करना चाहिए। यदि आप मजबूरी में इसका उपयोग कर रहे हैं, तो फ्लैट बॉटम (सपाट तल) वाले बर्तनों का ही प्रयोग करें ताकि बिजली की खपत कम हो और खाना जल्दी बने।
"सिलेंडर खत्म हो गया है और नया आने में 10 दिन का समय बताया जा रहा है। अब इंडक्शन ही सहारा है, लेकिन डर है कि कहीं अगले महीने बिजली का बिल घर का बजट न बिगाड़ दे।" — एक स्थानीय उपभोक्ता