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८३ लाख का शिक्षण घुटाला

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८३ लाख का शिक्षण घुटाला Good Morning Nagpur

 

 शिक्षा उपसंचालक कार्यालय (Nagpur Division) में ८३ लाख रुपये के एरियर वितरण में अनियमितता का मामला।

• शिक्षकों के पुराने बकाए (Arrears) के नाम पर सरकारी धन के गबन का आरोप।

• विभागीय जांच के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई की संभावना।

नागपुर: नागपुर विभागीय शिक्षा उपसंचालक कार्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विभाग में शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन बकाए (एरियर) के वितरण में लगभग ८३ लाख रुपये के एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, यह फ़र्जीवाड़ा पिछले कुछ समय से चल रहा था, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता की प्रबल आशंका जताई जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला शिक्षकों के सातवें वेतन आयोग या अन्य पुराने बकाए (Arrears) के भुगतान के नाम पर किया गया। आरोप है कि कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलीभगत कर बकाए की राशि को मंजूरी दी, लेकिन यह राशि वास्तव में पात्र शिक्षकों तक पहुँचने के बजाय फ़र्जी खातों या बिचौलियों के माध्यम से गबन कर ली गई। ८३ लाख रुपये की यह भारी-भरकम राशि सरकारी खजाने से निकाल ली गई है।

शालार्थ आईडी और फ़र्जी बिलों का खेल:

आशंका जताई जा रही है कि इस घोटाले में 'शालार्थ आईडी' (शिक्षक वेतन प्रणाली) का गलत इस्तेमाल किया गया हो सकता है। यह भी संभव है कि बिना उचित सत्यापन के पुराने सालों के फ़र्जी बिल तैयार किए गए और उपसंचालक स्तर पर उन्हें मंजूरी दी गई। चूंकि इतनी बड़ी राशि का भुगतान बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी या हस्ताक्षर के संभव नहीं है, इसलिए तत्कालीन या वर्तमान उपसंचालक की भूमिका की गहन जांच की मांग उठ रही है।

कार्रवाई और जांच:

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया जा सकता है जो एरियर से संबंधित सभी फाइलों का ऑडिट करेगी। इसके अलावा, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को भी सौंपे जाने की संभावना है, ताकि आर्थिक अपराध के नज़रिए से इसकी निष्पक्ष जांच हो सके।

बढ़ सकता है घोटाले का दायरा:

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि पिछले ४-५ सालों के एरियर भुगतानों की सही से जांच की जाए, तो इस घोटाले का दायरा ८३ लाख रुपये से कहीं अधिक हो सकता है। इससे पहले भी नागपुर शिक्षा विभाग में फ़र्जी शिक्षक भर्ती और शालार्थ आईडी के मामलों में कई अधिकारी और क्लर्क गिरफ्तार हो चुके हैं।

यह नया घोटाला राज्य सरकार की 'जीरो टॉलरेंस टू करप्शन' की नीति पर सवालिया निशान लगाता है। अब सबकी नज़रें जांच के नतीजों और इसमें शामिल 'बड़ी मछलियों' पर होने वाली कार्रवाई है