-
--
नागपुर / डेस्क: हर साल 1 अप्रैल को दुनिया भर में लोग एक-दूसरे के साथ मजाक करते हैं और 'अप्रैल फूल' बनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन की शुरुआत कैसे हुई? दरअसल, इसके पीछे एक ऐतिहासिक कैलेंडर बदलाव की कहानी छिपी है।
कैलेंडर बदलने से हुई शुरुआत
इतिहासकारों के अनुसार, साल 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत की थी। इससे पहले 'जुलियन कैलेंडर' चलन में था, जिसमें नया साल 1 अप्रैल के आसपास मनाया जाता था। पोप ग्रेगरी ने नए कैलेंडर में नया साल 1 जनवरी से शुरू करने का आदेश दिया।
ऐसे पड़ा 'अप्रैल फूल्स' नाम
उस दौर में संचार के साधन कम थे, इसलिए कई लोगों तक इस बदलाव की जानकारी देरी से पहुंची। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो पुराने कैलेंडर को ही सही मानते थे और 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे।
जो लोग 1 जनवरी को नया साल अपनाने लगे थे, उन्होंने इन 'पुराने ख्यालात' वाले लोगों का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। उन्हें 'मदबुद्धि' या 'अप्रैल फूल्स' कहा जाने लगा, और यहीं से 1 अप्रैल को लोगों को बेवकूफ बनाने की परंपरा शुरू हो गई।
आज का दिन
आज के समय में यह दिन पूरी दुनिया में हंसी-मजाक और प्रैंक्स (Pranks) के लिए समर्पित है। तो आप भी आज सावधानी बरतें, कहीं कोई आपको 'अप्रैल फूल' न