“Courage allows us to face challenges with confidence and transform obstacles into opportunities for growth.”
"With faith in God and confidence in yourself, nothing is impossible."
The Less Competent should not judge the More Competent.
“If you are patient in one moment of anger, You will escape a hundred days of sorrow.”
“You will face many defeats in life, but never let yourself be defeated.”
Keep doing your best every day & if no one is proud of you, be proud of YOURSELF!
थर्ड जेंडर के नया बिल लोकसभा में परित ।
Share News:
Good Morning Nagpur
लोकसभा में 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक-2026' पारित: क्या बदल जाएगा अब?
नई दिल्ली: मंगलवार को लोकसभा में एक अहम और चर्चा का विषय बना 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक-2026' ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार द्वारा पेश किए गए इस बिल का उद्देश्य 2019 के मूल अधिनियम में बड़े बदलाव करना है।
विधेयक की मुख्य बातें:
* परिभाषा में बदलाव: नए विधेयक के अनुसार, अब ट्रांसजेंडर की परिभाषा को सीमित कर दिया गया है। इसमें मुख्य रूप से पारंपरिक समुदायों जैसे किन्नर, हिजड़ा, अरावनी, जोगता और इंटरसेक्स (intersex) विविधताओं वाले व्यक्तियों को ही शामिल किया गया है।
* स्व-पहचान का अधिकार खत्म: सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कोई व्यक्ति केवल अपनी मर्जी या 'स्व-अनुभूति' (Self-perception) के आधार पर अपनी लैंगिक पहचान तय नहीं कर पाएगा। 2019 के कानून में यह अधिकार दिया गया था, जिसे अब हटा दिया गया है।
* मेडिकल बोर्ड की भूमिका: अब ट्रांसजेंडर पहचान का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) एक मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लेंगे। इस बोर्ड का नेतृत्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) करेंगे।
* कड़े दंड का प्रावधान: बिल में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों के लिए सजा को और सख्त किया गया है। किसी व्यक्ति को जबरन ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर करने या बच्चों/वयस्कों को इस दिशा में प्रभावित करने पर 14 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
सरकार का पक्ष:
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सदन में कहा कि यह कदम उन लोगों के कल्याण के लिए है जो 'जैविक कारणों' से सामाजिक बहिष्कार झेलते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इससे वास्तविक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता मिलती रहेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचेगा।
विरोध और चिंताएं:
विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बिल को 'प्रतिगामी' बताया है। उनका तर्क है कि यह सुप्रीम कोर्ट के 2014 के 'नालसा' (NALSA) फैसले का उल्लंघन करता है, जिसने व्यक्ति को अपनी पहचान खुद चुनने का अधिकार दिया था। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।