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नई दिल्ली/छतरपुर: वरिष्ठ न्यूज़ एंकर चित्रा त्रिपाठी एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। मामला उनकी एक 'मानद डॉक्टरेट' (Honorary Doctorate) की डिग्री से जुड़ा है, जो उन्हें श्री कृष्णा विश्वविद्यालय, छतरपुर (म.प्र.) द्वारा प्रदान की गई थी। सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि जिस संस्थान ने उन्हें यह सम्मान दिया, उसे राज्य सरकार ने संदिग्ध गतिविधियों के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में न्यूज़ एंकर चित्रा त्रिपाठी की एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें वह श्री कृष्णा विश्वविद्यालय से 'डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी' (PhD) की मानद उपाधि प्राप्त करती दिख रही हैं। इस दस्तावेज़ पर 29 अप्रैल 2024 की तारीख दर्ज है। हालांकि, विवाद तब शुरू हुआ जब 20 फरवरी 2026 की एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित 9 राज्यों में फैले एक बड़े फर्जी डिग्री गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है।
यूनिवर्सिटी पर उठ रहे सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन ने ऐसे 14 विश्वविद्यालयों को चिन्हित किया है जो अवैध रूप से डिग्री और मार्कशीट बांटने के गिरोह से जुड़े थे। सोशल मीडिया पर यूजर्स का तर्क है कि:
• यदि विश्वविद्यालय की मान्यता पर सरकार ने सवाल उठाए हैं या उसे ब्लैकलिस्ट किया है, तो वहां से जारी किए गए सभी सम्मान और डिग्रियां स्वतः ही अवैध या 'फर्जी' की श्रेणी में आ जाती हैं।
• पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे से जुड़े व्यक्ति का ऐसे संस्थान से सम्मान लेना उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
फर्जी डिग्री गिरोह का जाल
कानपुर से सामने आई जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और भारी भरकम रकम लेकर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करता था। इसी कड़ी में अब श्री कृष्णा विश्वविद्यालय द्वारा बांटी गई मानद उपाधियों की भी जांच की मांग उठ रही है।