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नई दिल्ली: भारत के सार्वजनिक शिक्षा ढांचे में पिछले एक दशक में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2014-15 से 2024-25 के बीच देश भर में लगभग 93,000 सरकारी स्कूल बंद या मर्ज (विलीन) कर दिए गए हैं।
प्रमुख आंकड़े और राज्य:
• कुल गिरावट: 2014-15 में स्कूलों की संख्या 11.07 लाख थी, जो अब घटकर 10.13 लाख रह गई है।
• सबसे प्रभावित राज्य: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश इस सूची में सबसे ऊपर हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग 25,000 और मध्य प्रदेश में करीब 30,000 स्कूलों की कमी आई है।
• अन्य राज्य: महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में भी बड़ी संख्या में स्कूलों का विलय हुआ है।
स्कूल बंद होने के कारण:
सरकार ने इस गिरावट के पीछे कई प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय (Demographic) कारण बताए हैं:
1. कम नामांकन (Low Enrollment): कई स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 से भी कम रह गई थी।
2. स्कूलों का विलय (Rationalization): संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए पास-पास स्थित छोटे स्कूलों को एक बड़े स्कूल में मिला दिया गया।
3. निजी स्कूलों की ओर झुकाव: आंकड़ों से पता चलता है कि इसी अवधि में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या में वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों की चिंता:
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में स्कूल बंद होने से गरीब बच्चों, विशेषकर लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंच मुश्किल हो सकती है। लंबी दूरी तय करना स्कूल छोड़ने (Dropout) का एक मुख्य कारण बन सकता है।