“Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
कई बच्चों का Biological पिता है अशोक खरात,DNA की जाँच जारी:SIT
Share News:
Good Morning Nagpur
कई बच्चों का 'जैविक पिता' है अशोक खरात? डीएनए टेस्ट की उठने लगी मांग, एसआईटी जांच जारी
नाशिक: स्वयं को बाबा और 'कैप्टन' कहने वाले अशोक खरात के काले कारनामों की परतें खुलती जा रही हैं। अब एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने समाज और जांच एजेंसियों को सन्न कर दिया है। नाशिक के एक प्रसिद्ध आईवीएफ (IVF) क्लिनिक से जुड़े सूत्रों और एसआईटी (SIT) की जांच के अनुसार, यह बात सामने आ रही है कि अशोक खरात कई महिलाओं के बच्चों का जैविक (Biological) पिता हो सकता है।
जांच में बड़े खुलासे:
सूत्रों के मुताबिक, खरात ने एक फर्टिलिटी सेंटर में स्पर्म डोनेट किया था। आरोप है कि क्लिनिक ने निसंतान महिलाओं को गुमराह करते हुए इसे 'दैविक संतान' की प्राप्ति का उपाय बताया और उन्हें खरात के स्पर्म का उपयोग करने की सलाह दी।
डीएनए टेस्ट की बढ़ती मांग:
इस चौंकाने वाली खबर के बाद, कई परिवारों में भूचाल आ गया है। जिन दंपत्तियों ने उस समय संतान प्राप्ति के लिए इस प्रक्रिया को अपनाया था, अब वे गहरे संशय में हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ पिता अब अपने बच्चों का डीएनए (DNA) टेस्ट कराने की मांग कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनके बच्चे का जैविक पिता कौन है।
(फोकस: 'बिखरते परिवार' और 'अवैध कार्य')
शीर्षक: 'दैविक संतान' के नाम पर महापाप! अशोक खरात के कुकर्मों से बिखर गए कई परिवार, अवैध गर्भपात का भी आरोप
नाशिक: कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात की असलियत सामने आने के बाद कई हंसते-खेलते परिवार टूटने की कगार पर पहुँच गए हैं। खरात पर लगे गंभीर आरोपों ने न केवल उसकी आपराधिक मानसिकता को उजागर किया है, बल्कि उन महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन को भी तबाह कर दिया है जो संतान की आस में उसके पास आए थे।
पवित्र रिश्तों में कलह:
लेख के अनुसार, संतान प्राप्ति के लिए जो महिलाएं खरात के संपर्क में आई थीं, अब उनके परिवारों में भारी विवाद और कलह शुरू हो गई है। समाज में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, जिससे इन महिलाओं का जीना दूभर हो गया है। सामाजिक बदनामी के डर से कई परिवार बिखरने के मोड़ पर हैं।
जांच की पेचीदगी:
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, एसआईटी सूत्रों का कहना है कि जब तक संबंधित महिलाएं खुद आगे आकर शिकायत दर्ज नहीं करातीं, तब तक इस पहलू पर गहराई से जांच करना मुश्किल है। प्रशासन का मानना है कि बिना औपचारिक शिकायत के आगे बढ़ने से कई परिवारों में और भी अधिक विवाद बढ़ सकता है।