“Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
समझोता कराना भारत ने किया मध्यस्ता-ईरान और भारत के मुखिया मिले ।
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Good Morning Nagpur
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय खबर:मुख्य कूटनीतिक बिंदु और शर्तें
ईरान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में युद्ध विराम के लिए दो टूक शर्तें रखी हैं:
* तुरंत सैन्य कार्रवाई पर रोक: पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट किया कि शांति की पहली शर्त यह है कि अमेरिका और इजरायल अपनी आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत बंद करें। ईरान इसे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानता है।
* पुनरावृत्ति न होने की 'गारंटी': केवल मौजूदा हमलों को रोकना काफी नहीं है; राष्ट्रपति ने भविष्य के लिए सुरक्षा की गारंटी मांगी है। उनका संकेत हाल के उन हमलों की तरफ है जिनमें ईरानी हितों और कमांडरों को निशाना बनाया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका और भारत का रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत के दौरान भारत के संतुलित और 'शांति दूत' वाले रुख को दोहराया:
* संवाद और कूटनीति: भारत का मानना है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। पीएम मोदी ने "युद्ध का युग नहीं" (Not an era of war) वाले अपने मंत्र को दोहराते हुए दोनों पक्षों से कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की।
* मानवीय सहायता: भारत ने गाजा और क्षेत्र के अन्य प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) की निरंतर आपूर्ति और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया।
* रणनीतिक संबंध: ईरान और भारत के बीच चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई, जो भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुँचने का मुख्य द्वार है। क्षेत्र में अस्थिरता इन आर्थिक हितों को भी प्रभावित करती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
* मध्य पूर्व में तनाव: यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब इजरायल और लेबनान (हिजबुल्लाह) के बीच संघर्ष बढ़ रहा है और ईरान सीधे तौर पर इसमें शामिल होने की कगार पर है।
* मध्यस्थ के रूप में भारत: दुनिया भारत की ओर एक ऐसे देश के रूप में देख रही है जिसके संबंध इजरायल और ईरान दोनों के साथ अच्छे हैं। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का पीएम मोदी को अपनी शर्तें बताना यह दर्शाता है कि ईरान भारत को एक विश्वसनीय मध्यस्थ मानता है।
निष्कर्ष: लागत यूएसए के कहने पर गया भारत बात करने ।