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नॉनटीचिंग स्टाफ सीधे नहीं बन पाएंगे शिक्षक :GR

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नॉनटीचिंग स्टाफ सीधे नहीं बन पाएंगे शिक्षक :GR Good Morning Nagpur

नॉनटीचिंग स्टाफ़ सीधे नहीं बन पाएंगे शिक्षक. 

​​​​​​ GMNEWS:नागपुर:महाराष्ट्र शासन के स्कूली शिक्षा और खेल विभाग ने 25 मार्च, 2026 को एक महत्वपूर्ण शासन निर्णय (GR) जारी किया है। यह निर्णय स्कूल और कॉलेजों में गैर-शिक्षण पदों (Non-teaching staff) से शिक्षण पदों (Teaching posts) पर होने वाली नियुक्तियों से जुड़ा है।
 यहाँ इस निर्णय की विस्तृत जानकारी  में दी गई है
महाराष्ट्र में अब क्लर्क या चपरासी सीधे नहीं बन पाएंगे शिक्षक महाराष्ट्र सरकार ने एक पुराने नियम को खत्म कर दिया है जिसके तहत स्कूलों और कॉलेजों में काम करने वाले शिक्षकेत्तर कर्मचारी (Non-teaching staff) अपनी योग्यता के आधार पर सीधे शिक्षण सेवक या शिक्षक के पद पर नियुक्त हो जाते थे।
क्या था पुराना नियम?
10 जून, 2005 के एक सरकारी आदेश के अनुसार, यदि कोई गैर-शिक्षण कर्मचारी (जैसे क्लर्क या अन्य स्टाफ) आवश्यक शैक्षणिक योग्यता (B.Ed/D.Ed आदि) पूरी कर लेता था, तो उसे उसी स्कूल या कॉलेज में खाली पद पर 'शिक्षण सेवक' के रूप में नियुक्त किया जा सकता था। उनकी पिछली सेवा को पेंशन के लिए भी गिना जाता था।
नया बदलाव क्या है?
सरकार ने अब इस प्रावधान को पूरी तरह से रद्द (Overrule) कर दिया है। 25 मार्च 2026 के इस नए आदेश के अनुसार:
 * अब कोई भी गैर-शिक्षण कर्मचारी सीधे शिक्षक नहीं बन पाएगा।
 * शिक्षण पदों पर नियुक्ति के लिए अब पवित्र पोर्टल (Pavitra Portal) और शिक्षक अभियोग्यता व बुद्धिमत्ता चाचणी (TAIT Exam) के माध्यम से आना अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
शासन निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि:
 * गुणवत्ता सर्वोपरि: बिना किसी प्रतियोगी परीक्षा (Competition) के केवल डिग्री के आधार पर नियुक्ति देने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।
 * समान अवसर: सरकार का मानना है कि केवल उच्च मेरिट वाले उम्मीदवारों को ही शिक्षक नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
 * पारदर्शिता: 2017 से राज्य में पवित्र पोर्टल के जरिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है, यह फैसला उसी नीति को और मजबूत बनाता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
 * यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
 * किसी भी पुराने आदेश, परिपत्र या नियम में अगर सीधे नियुक्ति का प्रावधान था, तो उसे भी अब अमान्य माना जाएगा।
 * इस निर्णय की कॉपी महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर कोड संख्या 202603251737063921 के साथ उपलब्ध है।
 
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