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१ महीने में २००० से अधिक मिसाइलोन को धोवस्त किया यूएई ने ।

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१ महीने में २००० से अधिक मिसाइलोन को धोवस्त किया यूएई ने । Good Morning Nagpur

1 महीने से 'दुबई' बना ईरान का मुख्य निशाना 

इजरायल से अधिक यूएई पर हुए हमले।


यूएई:दुबई पिछले एक महीने से मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रक्षा विशेषज्ञों और ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों का सबसे बड़ा हिस्सा इजरायल के बजाय संयुक्त अरब अमीरात (UAE), विशेष रूप से दुबई और अबू धाबी की ओर मोड़ा गया है।
आंकड़ों में तबाही और सुरक्षा का खेल
यूएई रक्षा मंत्रालय द्वारा आज जारी किए गए आंकड़ों ने पूरी दुनिया को अलर्ट कर दिया है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इन हमलों में अब तक कुल:
 * बैलिस्टिक मिसाइलें: 414 इंटरसेप्ट की गईं।
 * क्रूज मिसाइलें: 15 नष्ट की गईं।
 * ड्रोन (UAVs): 1,914 मार गिराए गए।
आज (29 मार्च) भी यूएई की एयर डिफेंस ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया, जब सुबह के समय ईरान की ओर से आए 16 बैलिस्टिक मिसाइलों और 42 ड्रोनों को हवा में ही ढेर कर दिया गया।
दुबई और अबू धाबी पर बढ़ा दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास मौजूद 'शॉर्ट-रेंज' मिसाइलों का भंडार इजरायल तक नहीं पहुँच सकता, जिसके कारण ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए इन्हें यूएई के आर्थिक केंद्रों की ओर मोड़ दिया है।
 * निशाने पर कौन?: हमलों का मुख्य उद्देश्य दुबई जैसे वैश्विक व्यापार केंद्रों और ऊर्जा ठिकानों को नुकसान पहुँचाना है।
 * नुकसान: यद्यपि THAAD और Patriot जैसे डिफेंस सिस्टम ने 95% से अधिक हमलों को विफल किया है, लेकिन मिसाइलों के मलबे गिरने से अबू धाबी और दुबई के रिहायशी इलाकों में आग लगने और मामूली क्षति की खबरें आई हैं।
मानवीय क्षति
इन हमलों में अब तक 11 लोगों की जान गई है, जिनमें 2 सैन्य कर्मी और पाकिस्तान, भारत व नेपाल जैसे देशों के प्रवासी नागरिक शामिल हैं। लगभग 178 लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है।
"यूएई की वायु सेना और रक्षा प्रणालियां किसी भी खतरे से निपटने के लिए 24 घंटे हाई अलर्ट पर हैं। हम अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।" — रक्षा मंत्रालय, यूएई
नागरिकों के लिए चेतावनी
अधिकारियों ने नागरिकों से शांत रहने और केवल आधिकारिक समाचार एजेंसी 'WAM' पर भरोसा करने की अपील की है। इंटरसेप्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करना सख्त मना है, क्योंकि इससे सुरक्षा प्रणालियों की स्थिति उजागर हो सकती है।

 
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