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फैक्ट चेक: क्या नौकरी से निकाले जाने पर अब 6 महीने की सैलरी मिलेगी?

न्यूज़ एजेंसी सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि सरकार के "नए नियम" के तहत यदि कोई कंपनी आपको नौकरी से निकालती है, तो उसे आपको 6 महीने की सैलरी देनी होगी।
डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के नजरिए से हमने इस दावे की पड़ताल की है। यहाँ इसकी पूरी सच्चाई दी गई है:
दावे का सच: भ्रामक और गलत
भारत सरकार या श्रम मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) ने ऐसा कोई भी नियम लागू नहीं किया है जिसमें सभी कर्मचारियों को नौकरी जाने पर अनिवार्य रूप से 6 महीने की सैलरी देने का प्रावधान हो। यह वायरल पोस्ट पूरी तरह से फेक न्यूज़ और 'क्लिकबेट' है।
नए लेबर कोड (2025-26) के वास्तविक नियम क्या हैं?
सरकार ने श्रम कानूनों में बड़े बदलाव (New Labour Codes) जरूर किए हैं, लेकिन वे इस वायरल दावे से अलग हैं:
 * फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF): नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या उसे निकाला जाता है, तो कंपनी को उसका सारा बकाया (Wages) नौकरी छोड़ने के 2 वर्किंग डेज (कार्य दिवसों) के भीतर चुकाना होगा। पहले इसके लिए 30 से 45 दिन का समय मिलता था।
 * ग्रेच्युटी (Gratuity): फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTE) के लिए अब 5 साल के बजाय 1 साल की सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी का हकदार होने का प्रावधान है।
 * नोटिस पीरियड: नोटिस पीरियड अभी भी कंपनी और कर्मचारी के बीच हुए एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर करता है। आमतौर पर यह 1 से 3 महीने का होता है। यदि कंपनी बिना नोटिस के निकालती है, तो उसे केवल नोटिस पीरियड की सैलरी देनी होती है।
 * री-स्किलिंग फंड (Worker Re-Skilling Fund): छंटनी (Retrenchment) के मामले में, नियोक्ता को कर्मचारी के 15 दिनों के वेतन के बराबर राशि एक सरकारी फंड में जमा करनी होगी, जिसका उपयोग उस कर्मचारी के कौशल विकास के लिए किया जाएगा।
बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance) की स्थिति
सरकार की कुछ योजनाएं जैसे 'अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना' (ABVKY) के तहत, यदि कोई व्यक्ति जो ESIC के अंतर्गत कवर है, अपनी नौकरी खो देता है, तो उसे 90 दिनों तक उसकी औसत सैलरी का 50% बेरोजगारी भत्ता मिल सकता है। लेकिन यह '6 महीने की पूरी सैलरी' वाला दावा नहीं है।
निष्कर्ष
वायरल हो रही फोटो में किया गया दावा झूठा है। किसी भी कंपनी के लिए 6 महीने की सैलरी देना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, जब तक कि आपके व्यक्तिगत कॉन्ट्रैक्ट में ऐसा न लिखा हो।

 
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