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पत्नी नौकरानी नहीं:सुप्रीम कोर्ट

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पत्नी नौकरानी नहीं:सुप्रीम कोर्ट Good Morning Nagpur

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी:

"पत्नी नौकरानी नहीं है";

घर के कामों में पति की बराबर भागीदारी ज़रूरी
नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर एक ऐतिहासिक टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक पत्नी घर की "नौकरानी" नहीं होती है, और घर के कामकाज जैसे खाना बनाना, सफाई और कपड़े धोना केवल उसकी जिम्मेदारी नहीं है।
अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीशों ने लिंग आधारित रूढ़ियों पर कड़ा प्रहार किया। कोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
 * समान भागीदारी: पति को घर के दैनिक कार्यों (खाना पकाने, सफाई और धुलाई) में समान रूप से भाग लेना चाहिए।
 * सम्मान का अधिकार: पत्नी को परिवार में एक समान साथी का दर्जा प्राप्त है, न कि किसी अवैतनिक कर्मचारी का।
 * रूढ़िवादिता का अंत: समाज में व्याप्त इस धारणा को बदलना आवश्यक है कि घरेलू काम केवल महिलाओं के लिए हैं।
सामाजिक प्रभाव
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख वैवाहिक विवादों और घरेलू हिंसा के मामलों में एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा। यह आदेश न केवल कानूनी रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी परिवारों के भीतर समानता और सम्मान को बढ़ावा देने वाला है।
 
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