“Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
रूपाली चकनकर की मुश्किल बड़ी,अशीला पिक का मामला ।
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महाराष्ट्र राजनीति में हड़कंप: अशोक खरात विवाद के बाद रूपाली चाकणकर का इस्तीफा, क्या छिन जाएगी प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी?
मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से 'स्वयंभू बाबा' अशोक खरात और एनसीपी (अजित पवार गुट) की दिग्गज नेता रूपाली चाकणकर के कथित संबंधों को लेकर उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में, रूपाली चाकणकर ने राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, चर्चा यह है कि यह इस्तीफा स्वैच्छिक कम और पार्टी व सरकार के दबाव का नतीजा ज्यादा है।
मुख्य विवाद क्या है?
हाल ही में नासिक पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तथाकथित बाबा अशोक खरात पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और काले जादू जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर रूपाली चाकणकर की कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जिनमें वे खरात के पैर धोते और उनके लिए छाता पकड़े नजर आ रही हैं। इन तस्वीरों ने विपक्षी दलों, विशेषकर शिवसेना (UBT) की सुषमा अंधारे को आक्रामक होने का मौका दे दिया, जिन्होंने चाकणकर पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
'देवगिरी' बंगले पर हुई हाई-लेवल मीटिंग
सूत्रों के अनुसार, पार्टी की छवि को हो रहे नुकसान को देखते हुए एनसीपी (अजित पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने 'देवगिरी' बंगले पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में चाकणकर के भविष्य और पार्टी की गिरती साख पर गंभीर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस बात से नाराज है कि महिला अधिकारों की रक्षा करने वाले पद पर बैठी नेता का नाम ऐसे विवादों में आया।
दोहरी मुश्किल में चाकणकर
राज्य महिला आयोग से विदाई के बाद अब रूपाली चाकणकर के दूसरे महत्वपूर्ण पद, एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष, पर भी तलवार लटक रही है।
* पार्टी के भीतर दबाव: पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस विवाद से आगामी चुनावों में पार्टी की छवि धूमिल हो सकती है।
* इस्तीफे की मांग: राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि उन्हें जल्द ही प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी से भी मुक्त किया जा सकता है।
चाकणकर का पक्ष
हालांकि, रूपाली चाकणकर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो 5-6 साल पुराने हैं और वे केवल एक आध्यात्मिक श्रद्धा के चलते वहां गई थीं। उन्होंने इसे खुद को बदनाम करने की एक राजनीतिक साजिश करार दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में 'बाबा कांड' ने एक नया मोड़ ले लिया है। अब देखना यह होगा कि क्या अजित पवार गुट अपनी इस फायरब्रांड नेता का साथ देता है या उन्हें पूरी तरह से पदों से मुक्त कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश करता है।