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खुले आम अनाज की कला बाज़ारी
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Good Morning Nagpur
नागपुर में सरकारी अनाज की कालाबाजारी पर यह एक खोजी रिपोर्ट (Investigative Report) ।
एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: नागपुर में सरकारी अनाज की खुलेआम लूट, क्या DSO कार्यालय की मिलीभगत से फल-फूल रहा है कालाबाजारी का धंधा?
नागपुर | विशेष संवाददाता
उपराजधानी नागपुर में गरीबों के निवाले पर डाका डालने का खेल बड़े पैमाने पर जारी है। शहर और ग्रामीण इलाकों में राशन कार्ड धारकों के लिए आने वाला सरकारी अनाज (चावल और गेहूं) खुले बाजार में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि यह पूरा खेल जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) कार्यालय की मिलीभगत और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है।
कैसे हो रहा है यह खेल? (Modus Operandi)
* राशन दुकानों से गायब अनाज: कई इलाकों में कार्ड धारकों को अनाज "स्टॉक खत्म हो गया" कहकर लौटा दिया जाता है, जबकि वही अनाज रात के अंधेरे में निजी गोदामों और व्यापारियों तक पहुँचाया जाता है।
* कागजों पर वितरण: नागरिकों का दावा है कि उनके नाम पर ऑनलाइन पोर्टल पर अनाज वितरण तो दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में उन्हें अनाज नहीं मिल रहा।
* ई-पॉस (e-PoS) मशीन में सेंध: अंगूठे के निशान लेने के बावजूद वजन में कटौती या मशीनों में तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर अनाज की चोरी की जा रही है।
नागरिकों का सीधा आरोप: 'बिना संरक्षण, यह संभव नहीं'
नागपुर के सक्करदरा, कामठी और वाड़ी जैसे क्षेत्रों के निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राशन माफियाओं के तार सीधे प्रशासन से जुड़े हैं। नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद DSO विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। "जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है और बड़े माफिया बच निकलते हैं।"
प्रमुख मुद्दे जो सवाल खड़े करते हैं:
* DSO विभाग की चुप्पी: आखिर क्यों बड़े पैमाने पर हो रही इस तस्करी पर विभाग की विजिलेंस टीम खामोश है?
* निजी गोदामों में छापेमारी क्यों नहीं? नागपुर के आसपास कई ऐसे निजी गोदाम हैं जहाँ सरकारी बोरियों से अनाज निकालकर सादा बोरियों में भरकर उसे पॉलिश कर 'प्रीमियम चावल' बनाकर बेचा जा रहा है।
* अधिकारियों की संपत्ति की जांच: क्या विभाग के कुछ अधिकारी इस अवैध कारोबार से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं?
आगे क्या?
नागरिक अब इस मामले की शिकायत सीधे राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से करने की तैयारी कर रहे हैं। यदि समय रहते इस 'सिंडिकेट' को नहीं तोड़ा गया, तो हज़ारों गरीब परिवार कुपोषण और भुखमरी का शिकार होते रहेंगे।