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आधी रात को 🆔 बने मुंबई-पूना से रोहिणी के लैप टॉप से-मंत्राया पास हुआ ।

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आधी रात को 🆔 बने मुंबई-पूना से रोहिणी के लैप टॉप से-मंत्राया पास हुआ । Good Morning Nagpur

नागपुर के 'शालार्थ आईडी (Shalarth ID) घोटाले' में एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आधी रात को 🆔 बने मुंबई-पूना से रोहिणी के लैपटॉप से ।

GMNEWS:इस मामले में गिरफ्तार शिक्षा अधिकारी रोहिणी कुंभार के लैपटॉप की जांच में साइबर पुलिस और SIT (विशेष जांच दल) के हाथ बड़े सबूत लगे हैं।
बड़ी खबर: रोहिणी कुंभार के लैपटॉप से आधी रात को चलता था 'फर्जीवाड़ा'
नागपुर जिला परिषद की पूर्व प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रोहिणी कुंभार पर लगे आरोपों में अब तकनीकी सबूतों ने पुलिस का पक्ष और मजबूत कर दिया है।
1. मुंबई और पुणे से बनाई गईं फर्जी आईडी
जांच में यह सामने आया है कि रोहिणी कुंभार के लैपटॉप का उपयोग करके मुंबई और पुणे के सर्वर लोकेशंस के जरिए फर्जी शालार्थ आईडी (Shalarth ID) जेनरेट की गईं। इन आईडी का इस्तेमाल गैर-मौजूद या अपात्र शिक्षकों के नाम पर सरकारी खजाने से वेतन (Salary) निकालने के लिए किया जा रहा था।
2. समय: रात 11 बजे से सुबह 4 बजे का खेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन आईडी को बनाने और डेटा में छेड़छाड़ करने का काम रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच किया गया।
 * मकसद: इस समय सरकारी ऑफिस और सर्वर पर निगरानी कम होती है, जिसका फायदा उठाकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
 * IP एड्रेस की जांच: पुलिस को लैपटॉप के लॉग्स से पता चला है कि इस दौरान कई बार संदिग्ध IP एड्रेस का इस्तेमाल हुआ।
3. SIT की जांच में बड़ा खुलासा
नागपुर पुलिस की SIT ने जब रोहिणी कुंभार और सिद्धेश्वर कालुसे के उपकरणों को फोरेंसिक लैब भेजा, तो वहां से यह जानकारी निकलकर आई। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस खेल में पुणे के कुछ तकनीकी जानकार और शिक्षा विभाग के बड़े खिलाड़ी भी शामिल हो सकते हैं।
4. क्या है शालार्थ आईडी घोटाला?
यह घोटाला फर्जी तरीके से शिक्षकों की भर्ती दिखाने और उनकी सैलरी के नाम पर करोड़ों रुपये हड़पने से जुड़ा है। अब तक इस मामले में नागपुर से कई बड़े अधिकारियों और दलालों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

नागपुर के 'शालार्थ आईडी (Shalarth ID) घोटाले' में एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस मामले में गिरफ्तार शिक्षा अधिकारी रोहिणी कुंभार के लैपटॉप की जांच में साइबर पुलिस और SIT (विशेष जांच दल) के हाथ बड़े सबूत लगे हैं।
यहाँ इस खबर की पूरी डिटेल दी गई है:
बड़ी खबर: रोहिणी कुंभार के लैपटॉप से आधी रात को चलता था 'फर्जीवाड़ा'
नागपुर जिला परिषद की पूर्व प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रोहिणी कुंभार पर लगे आरोपों में अब तकनीकी सबूतों ने पुलिस का पक्ष और मजबूत कर दिया है।
1. मुंबई और पुणे से बनाई गईं फर्जी आईडी
जांच में यह सामने आया है कि रोहिणी कुंभार के लैपटॉप का उपयोग करके मुंबई और पुणे के सर्वर लोकेशंस के जरिए फर्जी शालार्थ आईडी (Shalarth ID) जेनरेट की गईं। इन आईडी का इस्तेमाल गैर-मौजूद या अपात्र शिक्षकों के नाम पर सरकारी खजाने से वेतन (Salary) निकालने के लिए किया जा रहा था।
2. समय: रात 11 बजे से सुबह 4 बजे का खेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन आईडी को बनाने और डेटा में छेड़छाड़ करने का काम रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच किया गया।
 * मकसद: इस समय सरकारी ऑफिस और सर्वर पर निगरानी कम होती है, जिसका फायदा उठाकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
 * IP एड्रेस की जांच: पुलिस को लैपटॉप के लॉग्स से पता चला है कि इस दौरान कई बार संदिग्ध IP एड्रेस का इस्तेमाल हुआ।
3. SIT की जांच में बड़ा खुलासा
नागपुर पुलिस की SIT ने जब रोहिणी कुंभार और सिद्धेश्वर कालुसे के उपकरणों को फोरेंसिक लैब भेजा, तो वहां से यह जानकारी निकलकर आई। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस खेल में पुणे के कुछ तकनीकी जानकार और शिक्षा विभाग के बड़े खिलाड़ी भी शामिल हो सकते हैं।
4. क्या है शालार्थ आईडी घोटाला?
यह घोटाला फर्जी तरीके से शिक्षकों की भर्ती दिखाने और उनकी सैलरी के नाम पर करोड़ों रुपये हड़पने से जुड़ा है। अब तक इस मामले में नागपुर से कई बड़े अधिकारियों और दलालों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
नागपुर के बहुचर्चित शालार्थ आईडी (Shalarth ID) घोटाले में SIT (विशेष जांच दल) की कार्रवाई अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर है। रोहिणी कुंभार और अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे रैकेट की परतें खुल रही हैं।
यहाँ इस घोटाले में शामिल प्रमुख चेहरों और अब तक की गिरफ्तारियों की पूरी जानकारी दी गई है:
घोटाले के मुख्य आरोपी और गिरफ्तार अधिकारी
इस मामले में शिक्षा विभाग के कई "बड़े खिलाड़ियों" के नाम सामने आए हैं। अब तक लगभग 26 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें शामिल हैं:
 * रोहिणी कुंभार (माध्यमिक शिक्षा अधिकारी): मुख्य आरोपी, जिनके लैपटॉप से फर्जी आईडी बनाने के सबूत मिले हैं।
 * सिद्धेश्वर कालुसे (प्राथमिक शिक्षा अधिकारी): कुंभार के साथ मिलकर फर्जी नियुक्तियों को मंजूरी देने का आरोप।
 * उल्हास नारद (पूर्व विभागीय उपसंचालक): घोटाले के शुरुआती दौर में जांच समिति के अध्यक्ष थे, लेकिन बाद में खुद ही आरोपी पाए गए और गिरफ्तार हुए।
 * रवींद्र काटोलकर (प्राथमिक शिक्षा अधिकारी): हालिया कार्रवाई में गिरफ्तार, इन पर पद पर रहते हुए 12 करोड़ रुपये के राजस्व को नुकसान पहुँचाने का आरोप है।
 * नीलेश वाघमारे (वेतन पथक अधीक्षक): इस पूरे घोटाले का "मास्टरमाइंड" माना जा रहा है, जिसने तकनीकी रूप से फर्जी आईडी पोर्टल पर दर्ज कीं।
 * चिंतामन वंजारी: पहले इस मामले की जांच कर रहे थे, लेकिन बाद में साक्ष्यों के आधार पर इन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
 * नितिन मेंढे (सेवानिवृत्त उपसंचालक): इन पर भी फर्जी आईडी को बैक-डेट में मंजूरी देने के गंभीर आरोप हैं।
कैसे चलता था 'मुंबई-पुणे' कनेक्शन?
SIT की जांच में यह साफ हुआ है कि यह केवल नागपुर तक सीमित नहीं था:
 * फर्जी आईडी का नेटवर्क: मुंबई और पुणे के आईटी विशेषज्ञों (हैकर्स/डाटा एंट्री ऑपरेटर्स) की मदद से शालार्थ पोर्टल का एक्सेस लिया जाता था।
 * रात का खेल: जैसा कि आपने बताया, रात 11 से सुबह 4 बजे के बीच जब सरकारी सर्वर पर ट्रैफिक कम होता था, तब पुणे के सर्वर का उपयोग कर इन फर्जी आईडी को 'अप्रूव' किया जाता था।
 * 600+ शिक्षक रडार पर: जांच में पाया गया कि लगभग 632 ऐसे केस हैं जहाँ बिना किसी वैध दस्तावेज के आईडी बनाई गई। इनमें से 430 नियुक्तियां पूरी तरह अवैध पाई गई हैं।
अब तक की बड़ी कार्रवाई (Summary Table)
| विवरण | ताजा आंकड़े |
| कुल गिरफ्तारियां | 26+ (अधिकारी, क्लर्क और बिचौलिए) |
| घोटाले की अनुमानित राशि | ₹100 करोड़ से ₹3000 करोड़ (राज्य स्तर पर) |
फर्जी शिक्षक आईडी | 500 से अधिक (अकेले नागपुर मंडल में) |
मुख्य धाराएं | धोखाधड़ी (420), फर्जीवाड़ा (467, 468) और आईटी एक्ट |
ताजा अपडेट: पुलिस अब उन स्कूल संस्था चालकों (Management) की लिस्ट तैयार कर रही है जिन्होंने प्रति शिक्षक ₹20 से ₹30 लाख लेकर ये फर्जी नियुक्तियां करवाई थीं।
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