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४९ विधान सभा बंगाल का SIR का सच ।

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४९ विधान सभा बंगाल का SIR का सच । Good Morning Nagpur

बंगाल की 49 सीटों पर चुनाव जीतने का अंतर (Victory Margin) उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम चुनाव से पहले 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न' (SIR) के तहत वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

 

1. क्या है 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न' (SIR)?

चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को शुद्ध करने के लिए यह एक सघन अभियान चलाया गया था। इसका उद्देश्य लिस्ट से उन नामों को हटाना था जो या तो मर चुके हैं, कहीं और शिफ्ट हो गए हैं या फर्जी/डुप्लिकेट हैं। पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान कुल 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए थे।

2. मुख्य आंकड़े और विश्लेषण

• कुल सीटें: बंगाल की 293 सीटों के नतीजे घोषित हुए (एक सीट पर चुनाव बाद में होना था)।

• 49 सीटों का गणित: इन 49 सीटों पर हार-जीत का अंतर इतना कम था कि अगर हटाए गए वोटरों में से कुछ भी वैध होते और वोट डालते, तो नतीजा बदल सकता था।

• पार्टी वार प्रभाव: इन 49 विवादित सीटों में से:

• BJP: 26 सीटों पर जीती।

• TMC: 21 सीटों पर जीती।

• Congress: 2 सीटों पर जीती।

4. विवाद का कारण

रिपोर्ट यह संकेत देती है कि हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है। उदाहरण के लिए, राजराहट-न्यू टाउन में बीजेपी मात्र 316 वोटों से जीती, जबकि वहां 24,132 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। विपक्षी दलों (खासकर TMC) ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में उनके समर्थकों के नाम जानबूझकर हटाए गए, जिससे चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा।

निष्कर्ष: यह न्यूज़ राजनीति में डेटा और वोटर लिस्ट के महत्व को दर्शाती है, जहाँ चुनाव आयोग की एक 'सफाई प्रक्रिया' सीधे तौर पर हार-जीत का निर्णायक कारक बन सकती है।

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