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नागपुर: महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने राज्य के भूमि अभिलेखों और शहरीकरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अब शहरी सीमा के भीतर आने वाली गावठाण (Gaothan) जमीन के लिए 'सातबारा उतारा' (7/12 extract) की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी और इसके बदले संपत्ति मालिकों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' जारी किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
जब कोई ग्रामीण क्षेत्र या गांव का हिस्सा शहर की सीमा (Municipal Corporation/Council) में शामिल होता है, तो उस जमीन का स्वरूप 'कृषि' से बदलकर 'अकृषक' (Non-Agricultural/NA) यानी नगरीय बस्ती में परिवर्तित हो जाता है। नियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में जमीन के मालिकाना हक के लिए सातबारा के बजाय प्रॉपर्टी कार्ड अधिक उपयुक्त और सरल दस्तावेज माना जाता है।
प्रमुख बिंदु और लाभ:
राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय (मुंबई) में हुई बैठक में इस निर्णय के कार्यान्वयन पर चर्चा की गई। इस बदलाव से नागरिकों को निम्नलिखित लाभ होंगे:
• संपत्ति हस्तांतरण में आसानी: प्रॉपर्टी कार्ड होने से जमीन या मकान को बेचने और नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी।
• बैंक लोन मिलने में सुविधा: बैंकों से कर्ज लेते समय सातबारा को लेकर अक्सर तकनीकी दिक्कतें आती थीं। प्रॉपर्टी कार्ड एक पुख्ता शहरी दस्तावेज होने के कारण बैंकों से लोन मिलना आसान होगा।
• रजिस्ट्री कार्य में सुलभता: जमीन की रजिस्ट्री और सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने में होने वाली देरी और जटिलता कम होगी।
• शहरी विकास को गति: महानगर पालिकाओं और नगर पालिकाओं में शामिल हुए नए गांवों को इस निर्णय का सीधा फायदा मिलेगा।
आगे की प्रक्रिया
राजस्व मंत्री बावनकुले के निर्देशों के बाद, राजस्व विभाग इस निर्णय पर अमल करने के लिए जल्द ही राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश (GR) जारी करेगा। इससे उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी जो शहर में रहकर भी अभी तक पुराने ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड्स के भरोसे थे।