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महाराष्ट्र के संपूर्ण राज्य मे फैला शालार्थ 🆔 घोटाला: सरकार की अदासीनता

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महाराष्ट्र के संपूर्ण राज्य मे फैला शालार्थ 🆔 घोटाला: सरकार की अदासीनता Good Morning Nagpur

महाराष्ट्र में शालार्थ आईडी (Shalarth ID) घोटाले की खबरें अब और भी गंभीर हो गई हैं।

उपराजधानी नागपुर:मार्च 2026 तक की लेटेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घोटाला केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे राज्य में फैल चुका है। यहाँ इस पूरे मामले की मुख्य खबरें दी गई हैं महाराष्ट्र शालार्थ आईडी घोटाला: मुख्य खबरें
1. कितने शहरों में फैला है जाल?
जांच का दायरा अब महाराष्ट्र के लगभग हर बड़े जिले तक पहुँच गया है। मुख्य रूप से इन शहरों में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़े पकड़े गए हैं:
 * पुणे (मुख्य केंद्र): यहीं से फर्जी आईडी जनरेट करने का खेल शुरू हुआ।
 * नागपुर: यहाँ साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है और कई शिक्षा अधिकारियों पर गाज गिरी है।
 * नाशिक और जलगांव: यहाँ भी सैकड़ों शिक्षकों के आईडी संदिग्ध पाए गए हैं।
 * छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और बीड़: मराठवाड़ा क्षेत्र में भी एसआईटी (SIT) अपनी जांच तेज कर चुकी है।
 * अमरावती और सोलापुर: यहाँ से भी गिरफ्तारियां हुई हैं।
2. कितने करोड़ का है यह घोटाला?
शुरुआती जांच में अनुमान लगाया गया था कि यह ₹50-60 करोड़ का मामला है, लेकिन ताजा अपडेट्स के मुताबिक:
 * यह घोटाला ₹100 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है।
 * एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि एक-एक आईडी के लिए शिक्षकों से ₹20 लाख से ₹30 लाख तक की रिश्वत ली गई थी।
 * अब तक 1,000 से अधिक आईडी की जांच की गई है, जिनमें से 600 से ज्यादा आईडी फर्जी पाए गए हैं।
3. अब तक की बड़ी कार्रवाई
 * SIT का गठन: राज्य सरकार ने इस घोटाले की गहराई तक पहुँचने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई है।
 * गिरफ्तारियां: अब तक 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पूर्व शिक्षा उप-संचालक (Deputy Directors), लिपिक (Clerks) और बिचौलिये शामिल हैं।
 * अवैध नियुक्तियां: उन सभी शिक्षकों की नियुक्तियों को अवैध घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है जिन्होंने फर्जी आईडी के जरिए सैलरी ली है। कई जिलों में शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनकी सैलरी रोक दी गई है।
4. क्या था पूरा खेल?
शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल 'शालार्थ' में बैकडोर एंट्री के जरिए बिना किसी सरकारी अप्रूवल के नए आईडी बनाए गए। इन आईडी की मदद से उन शिक्षकों को भी सरकारी खजाने से वेतन मिलने लगा जिनकी नियुक्ति नियमानुसार नहीं हुई थी।
 नागपुर जैसे शहरों में स्थिति इतनी गंभीर है कि पुलिस कार्रवाई के डर से कई अधिकारी अब शिक्षा विभाग में बड़े पद स्वीकार करने से भी कतरा रहे हैं।
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