Daily Wisdom Drop
  • “Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
  • The Light You Shine On Others Will Always Reflect Back On You.

मद्रास हाईकोर्ट की नसीहत

ADVERTISEMENT
Share News:
मद्रास हाईकोर्ट की नसीहत Good Morning Nagpur

 

मुख्य समाचार: सजा घटाकर मुआवजा बढ़ाना 'खतरनाक ट्रेंड'

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के एक फैसले को पलटते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में पैसे के बदले सजा कम करना समाज के लिए गलत संदेश है।

सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई के दौरान निम्नलिखित बातें कहीं:

• जवाबदेही से बचाव नहीं: आरोपी सिर्फ पैसा देकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। सजा कम कर मुआवजा बढ़ाना एक "खतरनाक चलन" है।• सजा का उद्देश्य: सजा का मुख्य उद्देश्य अपराध के प्रति डर पैदा करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराध रोके जा सकें।• संतुलन जरूरी: कोर्ट ने कहा कि सजा न तो अत्यधिक कठोर होनी चाहिए और न ही इतनी नरम कि अपराधी के मन से कानून का भय ही खत्म हो जाए।कोर्ट का अंतिम आदेशइस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

1. सजा बहाल: हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई 3 साल की सजा को फिर से लागू कर दिया गया है।

2. सरेंडर का आदेश: आरोपियों को 4 सप्ताह (एक महीने) के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने और अपनी शेष सजा काटने का निर्देश दिया गया है।

3. अवधि का समायोजन: ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि आरोपियों द्वारा पहले काटी गई जेल की अवधि को कुल सजा में समायोजित (adjust) किया जाए।

ADVERTISEMENT