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नागपुर: उपराजधानी नागपुर में चुनावी सुगबुगाहट के बीच मतदाता सूची और मतदान केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम चरम पर है। शहर के विभिन्न हिस्सों से मतदाताओं की शिकायतें आ रही हैं कि वे अपने मताधिकार के लिए बीएलओ (Booth Level Officer) के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारी नदारद हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर और निर्वाचन विभाग की भूमिका फिलहाल मौन बनी हुई है।
BLO की मनमानी: फोन बंद, दफ्तर खाली
मतदाताओं का आरोप है कि नए नाम जुड़वाने, पते में सुधार या मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) से जुड़ी समस्याओं के लिए जब वे निर्धारित केंद्रों पर जाते हैं, तो वहां ताला लटका मिलता है। बीएलओ के फोन या तो बंद आते हैं या वे संतोषजनक जवाब नहीं देते। कई वरिष्ठ नागरिकों और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने शिकायत की है कि महीनों से आवेदन करने के बावजूद उनकी लिस्ट में सुधार नहीं हुआ है।
कलेक्टर कार्यालय की चुप्पी पर सवाल
नागपुर जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय, जिसकी जिम्मेदारी चुनाव प्रक्रिया को सुगम बनाने की है, इस अव्यवस्था पर चुप है। नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मुख्य समस्याएं जो खड़ी कर रही हैं सवाल:
• मतदाता सूची में धांधली: एक ही पते पर कई अनजान लोगों के नाम या सक्रिय मतदाताओं के नाम गायब होना।
• BLO की अनुपलब्धता: मैदानी स्तर पर वेरिफिकेशन के लिए अधिकारियों का घर न पहुंचना।
• तकनीकी खामियां: ऑनलाइन पोर्टल और जमीनी रिकॉर्ड में भारी अंतर।
लोकतंत्र पर खतरा
चुनाव आयोग करोड़ों रुपये खर्च कर "मतदाता जागरूकता अभियान" चलाता है, लेकिन नागपुर की यह जमीनी हकीकत बताती है कि सरकारी मशीनरी की सुस्ती इस अभियान को नाकाम कर रही है। यदि समय रहते कलेक्टर कार्यालय ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो आगामी चुनावों में मतदान प्रतिशत पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।