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भारत में कोल से बनेगी गैस ।

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भारत में कोल से बनेगी गैस । Good Morning Nagpur

भारत सरकार ने ₹37,500 करोड़ की लागत वाली एक महत्वाकांक्षी कोल गैसीफिकेशन (Coal Gasification) योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। 

इस नई योजना (जिसे V-KALP के नाम से भी जाना जा रहा है) की विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है

• आयात पर निर्भरता कम करना: भारत वर्तमान में अपनी आवश्यकता का 50% से अधिक LNG, 20% यूरिया, और 90% से अधिक मेथेनॉल आयात करता है। यह योजना इन आयातों को कम करने के लिए स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी। 

• गैसीफिकेशन लक्ष्य: सरकार ने साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा है। 

• संसाधनों का उपयोग: भारत के पास लगभग 401 बिलियन टन का विशाल कोयला भंडार है, जो अगले 200 वर्षों के लिए पर्याप्त है। 

वित्तीय प्रोत्साहन और निवेश 

• प्रोत्साहन राशि: पात्र परियोजनाओं को संयंत्र और मशीनरी (Plant and Machinery) की लागत का अधिकतम 20% वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। 

• प्रोत्साहन की सीमा (Capping): 

• किसी एक परियोजना के लिए अधिकतम ₹5,000 करोड़。 

• किसी एक उत्पाद (SNG और यूरिया को छोड़कर) के लिए अधिकतम ₹9,000 करोड़। 

• किसी एक औद्योगिक समूह (Entity Group) के लिए सभी परियोजनाओं को मिलाकर अधिकतम ₹12,000 करोड़। 

• कुल निवेश: इस सरकारी सहायता से लगभग ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का कुल निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। 

### तकनीक और लाभ 

• सिन्गास (Syngas) उत्पादन: कोयले और लिग्नाइट को उच्च तापमान पर ऑक्सीजन और पानी के साथ प्रतिक्रिया कराकर सिन्गास (Synthesis Gas) बनाया जाता है। 

• विविध उत्पाद: इस सिन्गास का उपयोग यूरिया, अमोनिया, मेथेनॉल, हाइड्रोजन, और अन्य महत्वपूर्ण रसायनों के उत्पादन में किया जा सकता है। 

• रोजगार: इस योजना के तहत लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन का अनुमान है। 

• सरकारी राजस्व: 75 मिलियन टन कोयले के उपयोग से सरकार को सालाना लगभग ₹6,300 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। 

यह कदम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले व्यवधानों से भी देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखेगा।

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