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नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में पेरेंट्स के लिए बच्चों को खाना खिलाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस समस्या का समाधान अक्सर 'स्क्रीन' (फोन या टीवी) में ढूंढा जाता है। लेकिन हालिया शोध और विशेषज्ञों की राय एक चौंकाने वाला खुलासा कर रही है: फोन दिखाकर खाना खिलाना आपके बच्चे को कुपोषित और अंडरवेट बना सकता है।
फोन और वजन का क्या है कनेक्शन?
अक्सर माता-पिता खुश होते हैं कि फोन चलते ही बच्चा चुपचाप पूरी थाली खत्म कर लेता है। लेकिन डॉक्टर राजीव रंजन के अनुसार, यह 'शांति' बच्चे के स्वास्थ्य के लिए महंगी पड़ सकती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
• माइंडलेस ईटिंग (Mindless Eating): बच्चा स्क्रीन में इतना खो जाता है कि उसे पता ही नहीं चलता वह क्या खा रहा है। इससे उसके मस्तिष्क और पेट के बीच का तालमेल टूट जाता है।
• भूख के संकेतों की अनदेखी: स्क्रीन के कारण बच्चा अपनी 'हंगर क्यूज़' (Hunger Cues) यानी भूख और तृप्ति के संकेतों को मॉनिटर नहीं कर पाता।
• पोषण की कमी: जब ध्यान खाने पर नहीं होता, तो शरीर पाचक रसों (Digestive Enzymes) को सही तरीके से रिलीज नहीं करता, जिससे भोजन का पूर्ण पोषण शरीर को नहीं मिल पाता।
एक्सपर्ट की चेतावनी
पेरेंट्स के लिए कुछ जरूरी टिप्स
अगर आप इस आदत को बदलना चाहते हैं, तो इन बदलावों को अपनाएं:
1. नो गैजेट पॉलिसी: डाइनिंग टेबल पर फोन और टीवी को पूरी तरह बंद रखें।
2. बातचीत को बढ़ावा दें: खाना खाते समय बच्चे से उसके दिन के बारे में या खाने के स्वाद के बारे में बात करें।
3. रोल मॉडल बनें: अगर आप खुद खाते समय फोन इस्तेमाल करेंगे, तो बच्चा भी वही सीखेगा। पहले खुद बदलाव लाएं।
4. खाने को मजेदार बनाएं: अलग-अलग रंगों और आकार के भोजन परोसें ताकि बच्चे की रुचि खाने में जगे, स्क्रीन में नहीं।
निष्कर्ष: बच्चे का वजन न बढ़ना केवल कम खाने की वजह से नहीं, बल्कि गलत तरीके से खाने की वजह से भी हो सकता है। आज ही अपने बच्चे के भोजन से 'डिजिटल बाधा' को हटाएं और उसे स्वस्थ भविष्य दें।
ब्यूरो रिपोर्ट: