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नेताओं के रूम के बागर ९० महिला रणजीत कर ही नहीं सकती: पप्पू यादव
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Good Morning Nagpur
पप्पू यादव के बयान पर बवाल: बिहार राज्य महिला आयोग ने थमाया नोटिस, रद्द हो सकती है सांसदी?**
**पटना/पूर्णिया:** पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ **पप्पू यादव** अपने एक विवादित बयान के कारण बड़ी मुश्किलों में घिर गए हैं। महिला आरक्षण और परिसीमन बिल (131वां संवैधानिक संशोधन बिल, 2026) पर चर्चा के दौरान उन्होंने महिलाओं को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने पूरे देश में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
**क्या है पूरा मामला?**
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास न होने पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि भारत में महिलाओं को देवी तो कहा जाता है, लेकिन उन्हें सम्मान नहीं मिलता। इसी दौरान उन्होंने बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा:
नेताओं के रूम के बगैर 90% महिलाएं राजनीति कर ही नहीं सकती हैं।"*
उनके इस बयान को महिलाओं की अस्मिता और संघर्ष पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। विपक्षी और सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने इसे "भयानक और स्त्री-विरोधी" मानसिकता करार दिया है।
महिला आयोग की सख्त कार्रवाई**
बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले का **स्वत: संज्ञान (Suo Motu)** लिया है। आयोग की अध्यक्ष ने सांसद को कड़ा नोटिस जारी करते हुए **3 दिनों के भीतर** जवाब मांगा है। नोटिस में आयोग ने पूछा है:
* आपने महिलाओं के प्रति इतनी "घृणित" और "अपमानजनक" टिप्पणी क्यों की?
* आपकी इस अभद्र टिप्पणी के लिए क्यों न **लोकसभा अध्यक्ष** से आपकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की जाए?
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह बयान राजनीति में काम कर रही लाखों महिलाओं के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाता है और यह दर्शाता है कि वे अपनी योग्यता के दम पर आगे नहीं बढ़तीं, जो कि सरासर गलत है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं**
* **BJP:** भाजपा नेताओं ने इसे "शर्मनाक" बताते हुए पप्पू यादव से माफी की मांग की है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह उनकी घटिया सोच को दर्शाता है।
* **Congress:** कांग्रेस की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है, जिसमें इसे अपमानजनक बताया गया है।
* **सामाजिक कार्यकर्ता:** सुधा वर्गीज जैसी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे बयान सार्वजनिक जीवन में आने वाली महिलाओं का मनोबल तोड़ते हैं।
*पप्पू यादव की सफाई**
विवाद बढ़ने के बाद सांसद पप्पू यादव ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके बयान का उद्देश्य महिलाओं को नीचा दिखाना नहीं था, बल्कि वे राजनीति में पुरुषों द्वारा महिलाओं के शोषण के मुद्दे को उठाना चाह रहे थे। हालांकि, उनके शब्दों के चयन ने उन्हें चौतरफा घेरे में खड़ा कर दिया है।
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