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नागपुर/डेस्क: अपना सपनों का घर खरीदना अब न केवल आसान बल्कि आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद भी हो सकता है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होम लोन लेते समय अपनी मां को 'सह-आवेदक' (Co-applicant) बनाने से कई बड़े वित्तीय लाभ मिलते हैं।
प्रमुख फायदे:
• बड़ी टैक्स बचत: मां को को-एप्लीकेंट बनाने पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत मूलधन (Principal) भुगतान पर ₹1.5 लाख तक और धारा 24(b) के तहत ब्याज पर ₹2 लाख तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकती है।
• कम ब्याज दरें: कई प्रमुख बैंक महिला आवेदकों को होम लोन की ब्याज दरों में 0.05% से 0.10% तक की विशेष रियायत देते हैं। लंबी अवधि के लोन में यह छोटी सी छूट भी लाखों की बचत कराती है।
• स्टैम्प ड्यूटी में राहत: महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में अगर संपत्ति महिला के नाम पर या उनके साथ संयुक्त रूप से खरीदी जाती है, तो स्टैम्प ड्यूटी (Stamp Duty) में 1% से 2% तक की छूट मिलती है।
• लोन एलिजिबिलिटी में वृद्धि: यदि मां कामकाजी हैं या उनकी आय का कोई स्रोत (जैसे पेंशन या किराया) है, तो दोनों की आय मिलाकर बैंक अधिक लोन राशि मंजूर कर सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह: विशेषज्ञों का मानना है कि मां को को-एप्लीकेंट बनाने से न केवल लोन प्रक्रिया सरल होती है, बल्कि परिवार की महिला सदस्य के नाम पर संपत्ति होने से भविष्य में कानूनी और वित्तीय सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
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