-
--
मुरादाबाद/नई दिल्ली: इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के लिए एक बड़ी कानूनी जीत में, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस निर्णय से संगठन पर लगा 2017 का प्रतिबंध समाप्त हो गया है, जिससे उसकी मान्यता बहाल हो गई है।
मुख्य बिंदु:
• अधिकारों की पुनर्स्थापना: हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले ने INTUC के अधिकारों को पुनः स्थापित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2017 का प्रतिबंध अब अप्रासंगिक (irrelevant) है।
• अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर वापसी: इस फैसले के बाद, सरकारी बैठकों और अंतर्राष्ट्रीय मंचों में INTUC की भागीदारी का मार्ग फिर से खुल गया है।
• CLC जांच का हवाला: न्यूज़ पोस्ट के अनुसार, सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) की जांच में डॉ. जी. संजीवा रेड्डी के नेतृत्व वाली INTUC ही वैध पाई गई थी, जबकि अन्य दावों को निरस्त कर दिया गया।
• सरकार को निर्देश: कोर्ट ने भारत सरकार को 8 सप्ताह के भीतर 2017 के उस आदेश की समीक्षा करने का निर्देश दिया है, जिसके कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ था।
इस फैसले से JBCCI (संयुक्त द्विपक्षीय कोयला समिति) और अन्य द्विपक्षीय/त्रिपक्षीय सरकारी समितियों में INTUC की वापसी अब सुनिश्चित मानी जा रही है। श्रमिक नेताओं ने इसे केवल एक कानूनी जीत नहीं, बल्कि श्रमिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों की पुनर्स्थापना बताया है।
सैयद अफ़ज़ल हुसैन (इंटक नेता) ने यह मजदूरों के प्रतिनिधित्व और उनके अधिकारों की पुनर्स्थापना की जीत है।