-
--
नागपुर डेस्क: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें दुनिया बागेश्वर बाबा के नाम से जानती है, एक बार फिर अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा के केंद्र में हैं। नागपुर, जो पहले भी बाबा की 'चुनौती' को लेकर सुर्खियों में रहा है, वहां इस ताजा बयान ने नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और रिपोर्टों के अनुसार, बाबा ने एक कथा के दौरान महिलाओं (माताओं) के व्यवहार या आदतों को लेकर ऐसी टिप्पणी की है जिसे अपमानजनक माना जा रहा है। उनके इस बयान में 'माताओं के पीने' (नशा या अन्य संदर्भ) का जिक्र होने की बात कही जा रही है, जिससे नागपुर सहित पूरे महाराष्ट्र के विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश है।
नागपुर से पुराना नाता और विवाद
गौरतलब है कि नागपुर वही शहर है जहाँ 'अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' ने बाबा को चमत्कार सिद्ध करने की चुनौती दी थी, जिसके बाद बाबा कथा बीच में छोड़कर चले गए थे (जैसा कि समिति का दावा था)। अब इस नए बयान ने जलती आग में घी का काम किया है।
विरोध के मुख्य बिंदु:
• महिला संगठनों की नाराजगी: स्थानीय महिला संगठनों का कहना है कि पूजनीय पद पर बैठे व्यक्ति को महिलाओं के प्रति ऐसी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए।
• अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का रुख: समिति ने एक बार फिर बाबा के बयानों को समाज में भ्रम और नफरत फैलाने वाला करार दिया है।
• सोशल मीडिया पर वार-पलटवार: जहां बाबा के समर्थक इसे 'प्रवचन का अंश' बता रहे हैं, वहीं विपक्षी इसे 'स्त्री विरोधी' मानसिकता कह रहे हैं।
क्या कानूनी कार्रवाई होगी?
नागपुर में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में पुलिस प्रशासन से शिकायत करने और बाबा के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करने की मांग की है। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस सतर्क है ताकि किसी भी तरह का तनाव न बढ़े।