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भारत का प्रेस का स्थान १५७ वे पायदान पर ।

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भारत का प्रेस का स्थान १५७ वे पायदान पर । Good Morning Nagpur

 

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत 6 स्थान फिसला, 157वें पायदान पर पहुंचा

नई दिल्ली/पेरिस:

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत 180 देशों की सूची में 157वें स्थान पर आ गया है, जो पिछले वर्ष (151वें स्थान) के मुकाबले 6 पायदान नीचे है।

मुख्य आंकड़े और स्कोर

• भारत की वर्तमान रैंक: 157वां (180 देशों में)

• कुल स्कोर: 31.96 (100 में से)

• रैंकिंग में गिरावट: 6 स्थान (2025 में 151वें स्थान पर था)

विभिन्न संकेतकों (Indicators) का विवरण

सूचकांक में गिरावट मुख्य रूप से राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी दबावों के कारण देखी गई है:

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

रिपोर्ट में भारत में पत्रकारिता की स्थिति को "कठिन" (Difficult) श्रेणी में रखा गया है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए गए हैं:

1. पत्रकारों के लिए जोखिम: भारत को पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक माना गया है।

2. कानूनी उत्पीड़न: राजनीतिक दबाव, सख्त कानून और कानूनी कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।

3. हिंसा और दंडमुक्ति: पत्रकारों के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामलों में दोषियों का बच निकलना एक आम समस्या बनी हुई है।

4. संपादकीय स्वतंत्रता: मीडिया स्वामित्व का स्वरूप और सरकारी प्रभाव संपादकीय स्वतंत्रता को कमजोर कर रहा है।

पड़ोसी देशों की स्थिति

तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो भारत अपने कई पड़ोसी देशों से पीछे या उनके करीब है:

• पाकिस्तान: 153वां स्थान

• बांग्लादेश: 152वां स्थान

• भूटान: 150वां स्थान

• चीन: 178वां स्थान

• अफगानिस्तान: 175वां स्थान

• ईरान: 177वां स्थान

• रूस: 172वां स्थान

निष्कर्ष:

विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक और सुरक्षा संकेतकों में लगातार गिरावट लोकतांत्रिक ढांचे के चौथे स्तंभ के लिए एक बड़ी चुनौती है। अभिव्यक्ति की आजादी और स्वतंत्र पत्रकारिता के सुरक्षित माहौल को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।

 

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