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नई दिल्ली: देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे को 'खतरे का गलियारा' (Corridor of Peril) नहीं बनने दिया जाएगा।
मुख्य दिशा-निर्देश:
• भारी वाहनों पर पाबंदी: नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारों (कैरिज-वे या पक्का शोल्डर) पर भारी और कमर्शियल वाहनों के रुकने या पार्किंग करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
• केवल निर्धारित स्थान: वाहन अब केवल आधिकारिक रूप से तय किए गए 'पार्किंग बे' (Parking Bays), 'ले-बाय' या सड़क किनारे की सुविधाओं (Wayside Amenities) पर ही रुक सकेंगे।
• प्रशासनिक जवाबदेही: कोर्ट ने टिप्पणी की है कि प्रशासनिक लापरवाही या खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण आम जनता की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।
• 60 दिनों की समय सीमा: सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन नियमों को लागू करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए 60 दिन की समय सीमा दी है।
तकनीक से होगी निगरानी
सड़क सुरक्षा के इन नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा:
1. ATMS सिस्टम: एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए पुलिस को रियल-टाइम अलर्ट मिलेंगे।
2. GPS निगरानी: गलत पार्किंग की पुष्टि के लिए GPS और टाइमस्टैम्प वाली तस्वीरों का उपयोग किया जाएगा।
3. ई-चालान: नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत डिजिटल चालान जनरेट किए जाएंगे।