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नागपुर: नागपुर और विदर्भ के हाजियों के लिए समुद्री मार्ग (Sea Route) के जरिए हज का सफर एक बार फिर महज एक सपना बनकर रह गया है। सरकार की ओर से बार-बार किए गए दावों के बावजूद, इस साल भी हाजियों को महंगे हवाई सफर का बोझ उठाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि नागपुर का कोई भी बड़ा नेता इस गंभीर मुद्दे पर आवाज उठाने को तैयार नहीं है।
वादों की खुली पोल, हाजियों पर आर्थिक बोझ
केंद्र सरकार ने हज यात्रा को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए समुद्री जहाज सेवा फिर से शुरू करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन हकीकत यह है कि:
• महंगा हवाई सफर: समुद्री रास्ता न होने के कारण हाजियों को हवाई जहाज का भारी-भरकम किराया देना पड़ रहा है।
• बजट से बाहर: गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए समुद्री सफर एक किफायती विकल्प हो सकता था, जो अब सिर्फ कागजों तक सीमित है।
• सुविधाओं का अभाव: इस साल नागपुर से उड़ानें तो शुरू हुईं, लेकिन अंतिम समय पर कई हाजियों को मुंबई शिफ्ट कर दिया गया, जिससे बुजुर्गों को काफी परेशानी हुई।
नेताओं की खामोशी पर सवाल
नागपुर के हाजियों का कहना है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता अब पूरी तरह गायब हैं। किसी भी राजनीतिक दल या स्थानीय प्रतिनिधि ने संसद या विधानसभा में यह मुद्दा नहीं उठाया कि आखिर क्यों समुद्री जहाज की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
हर साल हमें उम्मीद दी जाती है कि अगले साल जहाज चलेगा, लेकिन साल बीत जाते हैं और कुछ नहीं बदलता। हमारे स्थानीय नेता सिर्फ तमाशबीन बने हुए हैं।" — एक स्थानीय हाजी का बयान।
क्या कभी पूरा होगा सपना?
हज यात्रियों ने मांग की है कि अगर सरकार वाकई में मुस्लिमों की भलाई चाहती है, तो समुद्री मार्ग को तुरंत बहाल किया जाए ताकि कम खर्च में लोग खुदा के घर जा सकें। नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है कि अगर नेताओं ने जल्द ही इस पर अपनी जुबान नहीं खोली, तो आने वाले समय में उन्हें जनता के कड़े सवालों का सामना करना पड़ेगा।
रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क, नागपुर