-
--
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD), जो देश के 12.4 लाख से अधिक दवा विक्रेताओं और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने ऑनलाइन फार्मेसी के अनियंत्रित कामकाज के खिलाफ 20 मई, 2026 को पूर्ण देशव्यापी बंद (बंद) का आह्वान किया है।
प्रमुख माँगें और चिंताएँ
दवा विक्रेताओं के इस कड़े कदम के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण और माँगें हैं:
• ई-फार्मेसी का अनियंत्रित विकास: संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाले प्लेटफॉर्म बिना किसी स्पष्ट कानूनी ढांचे के काम कर रहे हैं। उनका दावा है कि ये प्लेटफॉर्म उचित प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन के बिना दवाएं वितरित कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।
• प्रोपराइटरी और भारी छूट (Predatory Pricing): कॉर्पोरेट-समर्थित ई-फार्मेसी द्वारा 20% से 60% तक की भारी छूट दी जा रही है। AIOCD के अनुसार, NPPA नियमों के तहत खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन केवल 16% होता है, जिससे पारंपरिक दुकानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना असंभव हो गया है।
• कोविड-काल के नियमों को वापस लेना: संगठन सरकार से G.S.R. 220(E) और G.S.R. 817(E) जैसी अधिसूचनाओं को वापस लेने की माँग कर रहा है। उनका तर्क है कि ये प्रावधान महामारी के दौरान अस्थायी रूप से दिए गए थे, लेकिन अब इनका दुरुपयोग दवा नियमों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है।
• सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा: बिना डॉक्टर के पर्चे के ऑनलाइन दवा बिक्री से एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी गई है।
जनता पर प्रभाव और व्यवस्थाएँ
हड़ताल के कारण सामान्य दवा आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना है, जिसके लिए निम्न जानकारी महत्वपूर्ण है: