-
--
अमरावती/परतवाड़ा: परतवाड़ा में हालिया सांप्रदायिक तनाव और बिगड़ते माहौल के बीच पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बुधवार, 28 अप्रैल को जयस्तंभ चौक पर प्रस्तावित मंत्री नितेश राने की सभा को पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के फैसले का अब व्यापक विश्लेषण हो रहा है। जानकारों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन और सरकार ने इस तरह के संवेदनशील आयोजनों पर पहले ही सख्ती दिखाई होती, तो शहर में सांप्रदायिक स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
पुलिस की देरी या प्रशासनिक मजबूरी?
परतवाड़ा पुलिस ने अंततः सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मंत्री राने की सभा पर रोक लगा दी है। पुलिस का तर्क है कि प्रस्तावित स्थल 'जयस्तंभ चौक' एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ सड़कें संकरी हैं और पास में ही मस्जिद व चर्चित 'अयान कांड' से जुड़े अयान का घर है। ऐसे में भीड़ जुटने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का सीधा खतरा था।
हालांकि, आम जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि जब शहर पहले से ही 'अयान कांड' के बाद सुलग रहा था, तब ऐसे आयोजनों की तैयारी को शुरू में ही क्यों नहीं रोका गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकार और पुलिस पहले ही कड़ा रुख अपनाती, तो नफरती माहौल को बढ़ने से रोका जा सकता था।
संवेदनशीलता और पुलिस बंदोबस्त
परतवाड़ा थाने के प्रभारी सुरेश म्हस्के ने इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद को भेजी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बिना अनुमति सभा करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए परतवाड़ा और अचलपुर (जुड़वा शहर) में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
अयान कांड: आरोपी उजैर 2 मई तक रिमांड पर
इस पूरे विवाद की जड़ 'परतवाड़ा वीडियो कांड' में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के मुख्य आरोपी उजैर खान इकबाल खान को कोर्ट ने 2 मई तक पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) पर भेज दिया है। एसआईटी (SIT) इस मामले की गहन जांच कर रही है, ताकि इस घटना के पीछे के सभी पहलुओं को उजागर किया जा सके।
निष्कर्ष
परतवाड़ा की वर्तमान स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। एक तरफ जहां आरोपी पर कानूनी शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक सभाओं और बयानों ने शहर की फिजा में तनाव घोल दिया है। जानकारों का मत है कि शांति बहाल करने के लिए केवल पुलिस बल पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसे भड़काऊ आयोजनों पर समय रहते 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाना जरूरी है।
सोशल मीडिया पोस्ट (ओपिनियन)
📌 क्या परतवाड़ा में तनाव टाला जा सकता था?
परतवाड़ा पुलिस ने आखिरकार मंत्री नितेश राने की सभा पर रोक लगा दी है। संकरी सड़कें और संवेदनशील इलाका होने के कारण सुरक्षा का हवाला दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि— क्या यह फैसला लेने में बहुत देर हो गई?
अगर प्रशासन पहले ही सख्त कदम उठाता, तो सांप्रदायिक सौहार्द को पहुंचने वाली ठेस को कम किया जा सकता था। फिलहाल शहर पुलिस छावनी में तब्दील है और आरोपी उजैर पुलिस की गिरफ्त में है।
हमें शांति और कानून का साथ देना होगा।