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१५० करोड़ का शिक्षण ID का घोटाला ३ उपसंचालक SIT की राडार पर ।

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१५० करोड़ का शिक्षण ID का घोटाला ३ उपसंचालक  SIT की राडार पर । Good Morning Nagpur

यह खबर नाशिक (महाराष्ट्र) में हुए एक बड़े शिक्षा घोटाले के बारे में है। यहाँ आपकी सुविधा के लिए इस घटना की मुख्य खबरें दी गई हैं:

नाशिक शिक्षा विभाग में महाघोटाला: 892 फर्जी 'शालार्थ आईडी' से 150 करोड़ की धोखाधड़ी

GMNEWS:नाशिक: नाशिक संभाग के शिक्षा क्षेत्र में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इसमें लगभग 892 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की फर्जी 'शालार्थ आईडी' (Shalarth ID) बनाकर सरकार को करीब 150 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है।
प्रमुख बिंदु:
 * धोखाधड़ी का तरीका: आरोपियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना फर्जी शालार्थ आदेश तैयार किए। इसके जरिए पिछली तारीखों से वेतन और अन्य वित्तीय लाभ उठाए गए।
 * समय सीमा: यह पूरा खेल मार्च 2019 से जून 2025 के बीच खेला गया।
 * आरोपी: इस मामले में तीन पूर्व शिक्षा उप-निदेशकों, जिला वेतन विभाग के अधिकारियों और संबंधित शिक्षण संस्थाओं के पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
 * मुख्य संदिग्ध: जांच में सामने आया है कि तीन तत्कालीन उप-निदेशकों के कार्यकाल में ये फर्जी ड्राफ्ट दर्ज हुए:
   * नितिन बच्छाव: 85 ड्राफ्ट
   * नितिन उपासनी: 9 ड्राफ्ट
   * डॉ. भाऊसाहेब चव्हाण: सर्वाधिक 747 संदिग्ध ड्राफ्ट
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा उप-निदेशक कार्यालय के रिकॉर्ड से कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब पाई गई हैं। जिन रेफरेंस नंबरों के आधार पर आदेश जारी किए गए थे, उनका मूल रजिस्टर में कोई अस्तित्व ही नहीं है। इतना ही नहीं, सरकारी रजिस्टरों में काट-छांट कर फर्जी प्रविष्टियां करने की भी पुष्टि हुई है।
कानूनी कार्रवाई
नाशिक रोड पुलिस स्टेशन में शुक्रवार को इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में इस मामले की गहन जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक आर.आर. शेलके के नेतृत्व में मामले की जांच जारी है।
 क्या है शालार्थ आईडी?  महाराष्ट्र के निजी अनुदानित स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए 'शालार्थ आईडी' एक अनिवार्य डिजिटल पहचान है।
 
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