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नपटोल विभाग की लापरवाही से लूट रही जनता

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नपटोल विभाग की लापरवाही से लूट रही जनता Good Morning Nagpur

नागपुर जैसे बड़े शहर में यदि नापतूल विभाग (Metrology Department) अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।

 नापतूल विभाग की 'नींद' का हर्जाना भर रही जनता

GMNEWS नागपुर: उपराजधानी में इन दिनों आम उपभोक्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। एक तरफ महंगाई की मार है, तो दूसरी तरफ नापतूल विभाग की घोर उदासीनता ने व्यापारियों को मनमानी करने की छूट दे दी है। आलम यह है कि शहर के बाजारों में माप-तोल के मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
दोषी मौन, जनता परेशान
बाजारों से लगातार शिकायतें आ रही हैं कि राशन दुकानों, सब्जी मंडियों और यहां तक कि पेट्रोल पंपों पर भी माप-तोल में गड़बड़ी की जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि:
 * कम वजन: डिजिटल कांटों में हेराफेरी कर ग्राहकों को कम सामान दिया जा रहा है।
 * अनियमित जांच: विभाग द्वारा नियमित औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) न के बराबर हो रहे हैं।
 * शिकायतों पर सुस्ती: हेल्पलाइन या दफ्तर में शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
खड़ी युद्ध जैसी स्थिति
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि आज का उपभोक्ता एक तरह के 'अघोषित युद्ध' का सामना कर रहा है। उसे अपने हक के पैसे के बदले पूरा सामान लेने के लिए दुकानदार से लड़ना पड़ता है। जब रक्षक (विभाग) ही भक्षक बन जाए या अपनी आंखें मूंद ले, तो जनता किसके पास जाए?
 "हम पैसे पूरे देते हैं, लेकिन वजन में कटौती कर हमारी जेब काटी जा रही है। नापतूल विभाग की लापरवाही व्यापारियों के हौसले बुलंद कर रही है।" — एक पीड़ित उपभोक्ता
विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
क्या विभाग के पास पर्याप्त मैनपावर नहीं है, या फिर यह मिलीभगत का मामला है? यह सवाल अब नागपुर की सड़कों पर गूँज रहा है। यदि समय रहते विभाग ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो जनता का प्रशासन पर से विश्वास उठना तय है।
हमारा नजरिया:
नापतूल विभाग को केवल कागजों पर कार्रवाई दिखाने के बजाय धरातल पर उतरना होगा। दोषी व्यापारियों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई ही जनता को इस 'आर्थिक युद्ध' से बचा सकती है।

 
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