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दुबई/नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आधिकारिक तौर पर तेल निर्यातक देशों के संगठन 'OPEC' और 'OPEC+' से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। यह फैसला 1 मई 2026 से प्रभावी होगा। UAE का यह कदम वैश्विक ऊर्जा राजनीति और कीमतों के समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।
डेविड रोश का विश्लेषण: भारत को होगा सीधा फायदा?
क्वांटम स्ट्रैटेजी के दिग्गज रणनीतिकार डेविड रोश के अनुसार, UAE का यह फैसला भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।
• सस्ता तेल: रोश का मानना है कि OPEC एक 'कार्टेल' की तरह काम करता है जो जानबूझकर आपूर्ति कम रखकर कीमतें बढ़ाता है। UAE के बाहर आने से वह अपनी उत्पादन क्षमता का स्वतंत्र रूप से उपयोग कर पाएगा, जिससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें नीचे आ सकती हैं।
• सौदा करने की शक्ति: भारत के लिए अब UAE के साथ सीधे और अधिक लचीले व्यापारिक समझौते करना आसान होगा।
• युद्ध की चुनौतियां: हालांकि, रोश ने आगाह किया है कि वर्तमान में पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और लॉजिस्टिक बाधाओं (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति) के कारण कीमतों में गिरावट का असर तुरंत नहीं दिखेगा।
UAE ने क्यों लिया यह फैसला?
UAE की सरकारी समाचार एजेंसी (WAM) के अनुसार, यह एक "संप्रभु निर्णय" है। UAE अपनी उत्पादन क्षमता को 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाना चाहता है, जबकि OPEC के कोटा नियमों के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा था। अब UAE अपनी आर्थिक जरूरतों और भविष्य के निवेश के आधार पर स्वतंत्र फैसले ले |