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“माँ नहीं ,बाप नहीं,दादा की पेंशन आएगी तो पंट ख़रीदूँगा “

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“माँ नहीं ,बाप नहीं,दादा की पेंशन आएगी तो पंट  ख़रीदूँगा “ Good Morning Nagpur

'पेंशन आएगी तो पैंट लाऊंगा',

CHILD STORY ON INSTA @goodmoringnagpurnews
मासूम का जवाब सुन शिक्षक की आंखों में आए आंसू, अगले दिन खुद खरीदी नई यूनिफॉर्म

GMNEWS: ख़बर आज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा राजस्थान के करौली जिले का एक वीडियो इंसानियत की जीती-जागती मिसाल पेश कर रहा है। हिंडौन के बामनपुरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में घटी यह भावुक घटना न केवल एक बच्चे की बेबसी को बयां करती है, बल्कि एक शिक्षक की दरियादिली से गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते की गरिमा को भी बढ़ाती है।
क्या है पूरा मामला?
घटना के दिन, कक्षा 1 में शिक्षक शुभम शेरवाल पढ़ाई करवा रहे थे। उनकी नज़र अचानक छात्र 'राज' पर पड़ी, जो पुरानी और फटी हुई पैंट पहनकर स्कूल आया था। शिक्षक ने बच्चे को टोकते हुए प्यार से पूछा कि उसने स्कूल की नई यूनिफॉर्म क्यों नहीं पहनी। यह एक सामान्य सवाल था, लेकिन बच्चे का जवाब सुनकर पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया।
मासूम राज ने रुआंसे गले से कहा, "जब दादाजी की पेंशन आएगी, तब मैं नई पैंट खरीदूँगा।" यह एक वाक्य न केवल उस बच्चे की गरीबी को दर्शाता है, बल्कि एक गहरी पीड़ा को भी छिपाए हुए है।
दर्द भरी दास्तां
जब शिक्षक शुभम ने बच्चे के बारे में जानकारी ली, तो उसकी कहानी सुनकर उनकी आँखों में भी आँसू आ गए। राज की माँ का निधन तब हो गया था जब वह मात्र एक साल का था। दुःखद रूप से, उसके पिता की मृत्यु भी कुछ महीने पहले एक दुर्घटना में हो गई। अब यह मासूम अपनी दादी और बड़े भाई-बहनों के साथ बेहद तंगहाली में रहता है। उनकी जीविका का एकमात्र सहारा दादाजी की पेंशन है, जिसके लिए उन्हें हर महीने इंतज़ार करना पड़ता है।
शिक्षक की दरियादिली
बच्चे की आँखों में आंसू और उसकी बेबसी देखकर शिक्षक शुभम शेरवाल पूरी तरह से भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत उसे गले लगा लिया और ढांढस बंधाया। उन्होंने बिना एक पल भी गँवाए, अगले ही दिन अपने निजी खर्च पर राज के लिए नई शर्ट और पैंट खरीदी। यह छोटी सी पहल उस मासूम के चेहरे पर मुस्कान लौटाने में कारगर रही।
मदद के लिए बढ़े हाथ
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, शिक्षक शुभम शेरवाल की दरियादिली की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। सोशल मीडिया यूज़र्स उन्हें "समाज का असली नायक" बता रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि शिक्षक सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों को सहारा देना और सही दिशा में मार्गदर्शन करना भी उनका धर्म है।
वीडियो के वायरल होने के बाद समाज कल्याण विभाग और कई सामाजिक संस्थाएं बच्चे की मदद के लिए आगे आई हैं। उन्हें पढ़ाई की सामग्री व कपड़े उपलब्ध कराए गए हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि आज भी दुनिया में इंसानियत जीवित है और एक छोटा सा नेक काम किसी की जिंदगी बदल सकता है।
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