Daily Wisdom Drop
  • “Take risks: if you win, you will be happy; if you lose, you will be wise.”
  • The Light You Shine On Others Will Always Reflect Back On You.

शिक्षा विभाग का सब से बड़ा ३०० करोड़ का घोटाले की रिपोर्ट

ADVERTISEMENT
Share News:
शिक्षा विभाग का सब से बड़ा ३०० करोड़ का घोटाले की रिपोर्ट Good Morning Nagpur

महाराष्ट्र में 'शालार्थ आईडी' (Shalarth ID) घोटाला शिक्षा विभाग के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचारों में से एक माना जा रहा है। यह घोटाला न केवल नागपुर बल्कि पूरे महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला देने वाला है।

GMNnews: इस घोटाले की पूरी कहानी, कार्यप्रणाली और नागपुर के कनेक्शन को विस्तार से समझाया गया है:
शालार्थ आईडी (Shalarth ID) क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन को पारदर्शी बनाने के लिए 'शालार्थ' (Shalarth) नामक एक ऑनलाइन प्रणाली शुरू की थी। हर वैध शिक्षक को एक यूनिक 15-अंकों की आईडी दी जाती है, जिसके आधार पर सीधे उनके बैंक खाते में सरकारी खजाना (Treasury) से वेतन जमा होता है।
घोटाले की शुरुआत: कैसे हुआ खेल?
यह घोटाला तब शुरू हुआ जब कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर 'बैकडोर एंट्री' का रास्ता निकाला।
 * फर्जी नियुक्तियां: कई निजी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियां बिना सरकारी अनुमति (Staff Approval) के की गईं।
 * पुराने डेटा से छेड़छाड़: पोर्टल में तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर, सिस्टम में पुराने या सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारियों की आईडी को नए, अपात्र लोगों के नाम पर बदल दिया गया।
 * पैसे का लेनदेन: आरोप है कि एक शालार्थ आईडी 'एक्टिव' करने के लिए ₹10 लाख से ₹25 लाख तक की रिश्वत ली गई।
 * लॉगिन का दुरुपयोग: शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के 'लॉगिन क्रेडेंशियल्स' (ID-Password) का इस्तेमाल कर अवैध नियुक्तियों को सिस्टम में वैध दिखाया गया।
नागपुर का कनेक्शन: घोटाले का केंद्र
नागपुर में यह घोटाला तब सुर्खियों में आया जब जिला परिषद (ZP) और शिक्षा उप-निदेशक (Deputy Director of Education) कार्यालय के कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए।
 * नागपुर की जांच: नागपुर में जांच के दौरान पाया गया कि कई शिक्षकों को वेतन तो मिल रहा था, लेकिन उनके पास आवश्यक TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) प्रमाण पत्र या सरकार की पूर्व अनुमति नहीं थी।
 * अधिकारियों पर गाज: नागपुर संभाग के कुछ बड़े अधिकारियों को इस मामले में निलंबित किया गया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पाया कि कई फाइलें गायब कर दी गई थीं।
पूरे महाराष्ट्र में असर (State-wide Impact)
पुणे, ठाणे, और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे शहरों में भी सैकड़ों फर्जी आईडी पकड़ी गई हैं।
 * TET घोटाला और शालार्थ: यह घोटाला 2019 के TET घोटाले से भी जुड़ा है। जिन लोगों ने पैसे देकर परीक्षा पास की थी, उन्हें बाद में फर्जी शालार्थ आईडी के जरिए वेतन शुरू करवा दिया गया।
 * आर्थिक नुकसान: अनुमान है कि इस घोटाले के कारण राज्य सरकार को हर महीने सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो फर्जी शिक्षकों के वेतन के रूप में जा रहा था।
वर्तमान स्थिति और कार्रवाई
सरकार ने अब इस पर कड़ा रुख अपनाया है:
 * आधार लिंकिंग: अब हर शालार्थ आईडी को आधार (Aadhaar) से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि एक व्यक्ति के नाम पर दो आईडी या फर्जी आईडी को पकड़ा जा सके।
 * पवित्र पोर्टल (Pavitra Portal): नई नियुक्तियों के लिए अब केवल 'पवित्र' पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो।
 * SIT की जांच: विशेष जांच टीमें (SIT) जिला स्तर पर वेतन बिलों का ऑडिट कर रही हैं।
निष्कर्ष
शालार्थ आईडी घोटाला सिर्फ पैसों का हेरफेर नहीं है, बल्कि यह उन योग्य उम्मीदवारों के साथ धोखा है जो सालों से ईमानदारी से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। नागपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) अभी भी कई 'मास्टरमाइंड्स' की तलाश कर रही है।
ADVERTISEMENT