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नई दिल्ली: निजी अस्पतालों द्वारा मेडिकल उपकरणों और दवाओं पर ली जाने वाली मनमानी कीमतों पर अब जल्द ही लगाम लग सकती है। केंद्र सरकार एक ऐसे नए कानून और फ्रेमवर्क पर विचार कर रही है, जिसके तहत अस्पताल अब मेडिकल प्रोडक्ट्स की लागत (Landing Price) से एक तय प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पाएंगे।
क्या है पूरी योजना?
सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार स्वास्थ्य सेवा को और अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से निजी अस्पतालों की बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना चाहती है। वर्तमान में, कई अस्पताल सर्जिकल आइटम और इम्प्लांट्स पर एमआरपी (MRP) के नाम पर भारी मार्जिन वसूलते हैं। प्रस्तावित नियमों के तहत:
• तय सीमा (Profit Cap): अस्पतालों के लिए मेडिकल उत्पादों की खरीद कीमत (Landing Price) पर एक 'कैपिंग' यानी अधिकतम मुनाफे की सीमा तय की जाएगी।
• इन चीजों पर पड़ेगा असर: इस नियम के दायरे में सिरिंज, पेसमेकर, स्टेंट और हार्ट वाल्व जैसे जीवन रक्षक उपकरण और कंज्यूमेबल्स शामिल होंगे।
• पारदर्शिता: अस्पतालों को अब इन उपकरणों की वास्तविक लागत और उन पर लगाए गए चार्ज का स्पष्ट विवरण देना होगा।
मरीजों को कैसे होगा फायदा?
अक्सर देखा गया है कि अस्पताल थोक में कम कीमत पर उपकरण खरीदते हैं, लेकिन मरीजों से उन पर प्रिंटेड एमआरपी वसूलते हैं, जो कई बार लागत से 200% से 500% तक अधिक होती है। नया फ्रेमवर्क लागू होने के बाद, सर्जरी और इलाज के कुल खर्च में भारी कमी आने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रिपोर्ट हकीकत में बदलती है, तो मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लिए निजी अस्पतालों में इलाज कराना काफी आसान हो जाएगा। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में 'उपभोक्ता अधिकारों' को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
रिपोर्ट: लाइव न्यूज़ डेस्क
स्रोत: / हिंदुस्तान टाइम्स