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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची हलचल और सातों सांसदों के बागी रुख पर अब पार्टी संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया सामने आई है। केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को 'डर की राजनीति' का नतीजा करार दिया है।
"डरा-धमका कर तोड़ने की कोशिश" - केजरीवाल
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जारी बयान में केजरीवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ने की यह कवायद किसी विचारधारा के कारण नहीं, बल्कि भय की वजह से हो रही है। उनके बयान के मुख्य अंश:
• एजेंसियों का डर: केजरीवाल ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों के दबाव में आकर सांसदों को डराया जा रहा है।
• दबाव की राजनीति: उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास जाने की कोशिश स्वाभिमान से नहीं, बल्कि मजबूरियों और मुकदमों के डर से की जा रही है।
• जनता का भरोसा: केजरीवाल ने जोर दिया कि "पार्टी एक विचारधारा है, जो डरकर छोड़कर जा रहे हैं, वे जनता की उम्मीदों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।"
पार्टी में बढ़ता संकट
एक साथ सातों सांसदों का सभापति के समक्ष गैर-हाजिर होना और बीजेपी में जाने की चर्चाओं ने 'आप' के सांगठनिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय कठिन है, लेकिन सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को डरने की जरूरत नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि केजरीवाल का "भय" वाला कार्ड दरअसल जनता के बीच सहानुभूति बटोरने और बागी सांसदों को नैतिक रूप से कटघरे में खड़ा करने की एक रणनीति है। यदि ये सांसद बीजेपी में शामिल होने के लिए पर्याप्त बहुमत (दो-तिहाई) साबित नहीं कर पाते, तो उनकी सदस्यता पर तलवार लटक सकती है।