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नागपुर पुलिस SIT ने की कुर्की अधिकारी और शिक्षकों की ।

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नागपुर पुलिस SIT ने की कुर्की अधिकारी और शिक्षकों की । Good Morning Nagpur

नागपुर की SIT (Special Investigation Team) 

GMnews: इस समय 'शालार्थ आईडी घोटाले' में अपनी जांच का दायरा बढ़ा चुकी है। रोहिणी कुंभार के लैपटॉप से मिले सबूतों के बाद SIT की कार्रवाई अब इन मुख्य बिंदुओं पर टिकी है:
1. टेक्निकल फॉरेंसिक जांच (IP एड्रेस ट्रेसिंग)
SIT ने पाया है कि रात 11 से सुबह 4 बजे के बीच जो फर्जी आईडी बनाई गईं, उनमें पुणे और मुंबई के सर्वर का इस्तेमाल हुआ था। SIT अब उन IP एड्रेस को ट्रेस कर रही है ताकि उन प्राइवेट आईटी एक्सपर्ट्स या हैकर्स तक पहुँचा जा सके जिन्होंने सरकारी पोर्टल में सेंध लगाने में मदद की।
2. 'मास्टरमाइंड' और बिचौलियों की धरपकड़
SIT केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन दलालों (Agents) की तलाश कर रही है जो स्कूल मैनेजमेंट और शिक्षा विभाग के बीच पुल का काम करते थे।
 * जांच में सामने आया है कि एक-एक फर्जी आईडी के बदले 25 से 40 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई थी।
3. बैक-डेटेड एंट्रीज का मिलान
SIT की टीम शिक्षा विभाग के पुराने रजिस्टरों और डिजिटल डेटा का मिलान कर रही है।
 * कई मामलों में नियुक्तियां 2012 या 2014 की दिखाई गई हैं, लेकिन उनकी शालार्थ आईडी 2022-23 में रात के वक्त चुपके से जेनरेट की गई। SIT इन विसंगतियों को सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है।
4. स्कूल मैनेजमेंट पर शिकंजा
नागपुर और आसपास के जिलों के कई निजी स्कूलों के संचालक अब SIT की रडार पर हैं।
 * आरोप है कि इन संचालकों ने बिना किसी विज्ञापन या चयन प्रक्रिया के, अपने करीबियों को शिक्षक के रूप में भर्ती दिखाया और अधिकारियों को रिश्वत देकर उनकी फर्जी आईडी बनवाई।
5. बैंक खातों की जांच
SIT उन बैंक खातों को फ्रीज कर रही है जिनमें इन फर्जी आईडी के जरिए सरकारी वेतन (Salary) जमा किया जा रहा था। पुलिस यह पता लगा रही है कि सैलरी आने के बाद पैसा किन खातों में वापस ट्रांसफर किया गया (Kickbacks)।
SIT की अगली बड़ी कार्रवाई:
खबरों के अनुसार, SIT जल्द ही पुणे के शिक्षा निदेशालय के कुछ वरिष्ठ लिपिकों (Clerks) और अधिकारियों को पूछताछ के लिए नागपुर समन कर सकती है, क्योंकि आईडी अप्रूव करने का मुख्य एक्सेस वहीं से मिलता है।
ताजा स्थिति: रोहिणी कुंभार और अन्य आरोपियों से जेल में भी पूछताछ उस "गुप्त कोड" या पासवर्ड का पता लगाया जा सके जिसका उपयोग रात में पोर्टल खोलने के लिए किया गया था।
 
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