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पुलिस अब आरोपियों की फोटो सार्वजनिक नहीं कर सकती और रोड परेड:कोर्ट

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पुलिस अब आरोपियों की फोटो सार्वजनिक नहीं कर सकती और रोड परेड:कोर्ट Good Morning Nagpur

 

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब अपराधियों की तरह सार्वजनिक नहीं की जा सकेंगी आरोपियों की तस्वीरें

जोधपुर/जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने पुलिस कार्यप्रणाली और नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जांच के दौरान पुलिस किसी भी आरोपी का चेहरा, फोटो, वीडियो या उसके व्यक्तिगत दस्तावेजों को मीडिया या सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं कर सकती।

क्या है कोर्ट का मुख्य आदेश?

न्यायमूर्ति की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर केवल आरोप लगने से वह अपराधी सिद्ध नहीं हो जाता। कोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

• पहचान की गोपनीयता: पुलिस गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को मीडिया के सामने पेश नहीं करेगी।

• दस्तावेजों पर रोक: आरोपी के निजी दस्तावेज, व्हाट्सएप चैट या कॉल रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करना उसकी निजता का उल्लंघन है।

• सोशल मीडिया पर पाबंदी: पुलिस विभाग के आधिकारिक हैंडल या पुलिसकर्मियों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर आरोपी की फोटो साझा करना अब दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आएगा।

कोर्ट ने क्यों लिया यह सख्त स्टैंड?

अदालत ने माना कि अक्सर पुलिस अपनी 'पीठ थपथपाने' के चक्कर में आरोपियों की तस्वीरें सार्वजनिक कर देती है। इसके कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं:

1. सामाजिक कलंक (Social Stigma): यदि बाद में आरोपी कोर्ट से निर्दोष बरी हो जाता है, तब भी समाज में उसकी छवि पहले ही खराब हो चुकी होती है। उसे और उसके परिवार को जीवनभर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

2. न्यायिक प्रक्रिया में बाधा: शिनाख्त परेड (Identification Parade) के दौरान गवाहों द्वारा आरोपी को पहचानना मुश्किल हो जाता है यदि उसकी फोटो पहले ही अखबारों या टीवी पर चल चुकी हो। इससे असली अपराधी को फायदा मिल सकता है।

3. निजता का अधिकार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है, जो आरोपी पर भी लागू होता है।

पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश

हाई कोर्ट ने राजस्थान के डीजीपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पूरे राज्य में इस संबंध में सर्कुलर जारी करें। यदि कोई पुलिस अधिकारी इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई की जाएगी।